जिला पंचायत सदस्यों को नहीं घसीटा, हथियारबंद बदमाश भी नहीं देखे, अब हाई कोर्ट ने किया तलब
Amit Bhatt, Dehradun: नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान मचे बवाल से जुड़े मामलों में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कथित तौर पर अपहृत बताए गए नैनीताल के 05 जिला पंचायत सदस्यों को न्यायालय ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। यह मामला मतदान से ठीक पहले … The post जिला पंचायत सदस्यों को नहीं घसीटा, हथियारबंद बदमाश भी नहीं देखे, अब हाई कोर्ट ने किया तलब appeared first on Round The Watch.
Amit Bhatt, Dehradun: नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान मचे बवाल से जुड़े मामलों में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कथित तौर पर अपहृत बताए गए नैनीताल के 05 जिला पंचायत सदस्यों को न्यायालय ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। यह मामला मतदान से ठीक पहले सामने आए घटनाक्रम और वायरल वीडियो के बाद सुर्खियों में आया था। खबर के साथ उस समय के घटनाक्रम के प्रमुख वायरल वीडियो भी साझा किए जा रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष चुनाव में अव्यवस्थाओं, 05 जिला पंचायत सदस्यों के कथित अपहरण, 01 मतपत्र में ओवरराइटिंग की शिकायत, पुनर्मतदान व निष्पक्ष चुनाव की मांग से जुड़ी स्वतः संज्ञान याचिका समेत अन्य जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। अदालत ने एसएसपी नैनीताल को अब तक हुई जांच की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 03 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
दरअसल, 14 अगस्त को जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के दिन मतदान से पहले कुछ सदस्यों के कथित अपहरण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया था। वहीं, जिला पंचायत सदस्य पूनम बिष्ट और पुष्पा नेगी ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि अध्यक्ष पद के चुनाव में एक मतपत्र पर क्रमांक में कथित तौर पर ओवरराइटिंग की गई, जिससे उसे अमान्य घोषित कर दिया गया। उन्होंने अदालत से अध्यक्ष पद के लिए दोबारा मतदान कराने का आग्रह किया था।
अब घटनाक्रम से अलग रुख: ‘अपहरण नहीं हुआ’
इस बीच, जिला पंचायत सदस्यों प्रमोद कोटलिया, डिकर सिंह मेवाड़ी, तरुण कुमार शर्मा, दीप सिंह बिष्ट और विपिन जंतवाल ने राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष अपने-अपने बयान दर्ज कराए थे। उनका कहना था कि उनका न तो अपहरण हुआ और न ही किसी तरह का दबाव डाला गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे निर्दलीय सदस्य हैं और चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के अलावा नोटा का विकल्प नहीं होने के कारण उन्होंने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। किसी प्रकार की मारपीट, जबरन घसीटने या हथियारबंद बदमाशों के होने की बात से भी उन्होंने निर्वाचन आयोग के समक्ष इनकार किया।
उक्त चुनाव में भाजपा प्रत्याशी दीपा दर्मवाल विजयी रहीं थीं, जबकि कांग्रेस समर्थित पुष्पा नेगी को पराजय का सामना करना पड़ा। अब हाईकोर्ट के तलब आदेश के बाद यह देखना अहम होगा कि व्यक्तिगत पेशी में सदस्य क्या बयान देते हैं और जांच की दिशा किस ओर जाती है। आपको बता दें कि संबंधित प्रकरण में कई वीडियो वायरल हुए थे। जिसमें भारी बवाल और गोलीकांड जैसी स्थिति भी नजर आ रही थी। साथ ही एक व्यक्ति को घसीटकर ले जाते हुए भी देखा गया।
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