श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में संगीतमय शाम का जादू
The post श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालयमें सजी सुरों की शाम appeared first on Avikal Uttarakhand. देहरादून। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय (एसजीआरआरयू) में मंगलवार को आयोजित ‘जेनिथ 2026’ का अंतिम दिन पूरी तरह संगीत और रोमांटिक गीतों की प्रस्तुतियों के नाम रहा। प्रसिद्ध बालीवुड गायक… The post श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालयमें सजी सुरों की शाम appeared first on Avikal Uttarakhand.
श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में संगीतमय शाम का जादू
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कम शब्दों में कहें तो, श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय (एसजीआरआरयू) में 'जेनिथ 2026' के अंतिम दिन रोमांटिक संगीत और युवा उत्साह का अद्वितीय समागम हुआ।
देहरादून। मंगलवार को श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय (एसजीआरआरयू) के हेलीपैड ग्राउंड पर आयोजित 'जेनिथ 2026' कार्यक्रम का अंतिम दिन पूरी तरह से संगीत और रोमांटिक गीतों की प्रस्तुतियों के नाम रहा। प्रसिद्ध बॉलिवुड गायक विशाल मिश्रा ने अपनी गायकी से इस शाम को खास बनाया।
विशाल मिश्रा ने कार्यक्रम शुरू होने से पहले श्री दरबार साहिब में माथा टेका और वहां के सज्जादे गद्दी नशीन पूजनीय श्री महंत देवेन्द्र दास जी महाराज से आशीर्वाद लिया। इस परंपरा के तहत उनका स्वागत कमीशन किया गया, जिससे कार्यक्रम का आरंभ और भी भावुक हो गया।
कार्यक्रम में भारतीय संगीत की महान गायिका आशा भोसले को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिससे आयोजन में एक भावनात्मक रंग छा गया। विश्वविद्यालय के माननीय प्रेसिडेंट श्री महंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि, "आशा भोसले जैसी महानता ने अपने सुरों से देश की आत्मा को स्वर दिया है।"
इस महोत्सव की विशेषता हाई वोल्टेज साउंड और अद्भुत लाइटिंग थी, जो वातावरण में एक रोमांटिक माहौल लाने में सफल रही। युवा दर्शकों ने हजारों की संख्या में अपने साथी मित्रों के साथ कार्यक्रम में भाग लेकर विशाल मिश्रा के गीतों का आनंद लिया।
विशाल मिश्रा ने अपने कार्यक्रम में "पहले भी मैं", "कैसे हुआ", "जानिये", "तेरी हो गईयां", "दिल झूम", "जिआल ए मिस्किन", "चल तेरे इश्क में", "मांझा", और "क्या बताऊं तुझे" जैसे सुपरहिट लव सॉन्ग्स का प्रदर्शन किया। इस दौरान दर्शकों का प्रतिक्रियाएं देखने लायक थीं। हर गीत पर दर्शक झूम उठे और रोमांस का जादू छाया रहा।
कार्यक्रम में एसजीआरआरयू के कुलपति डॉ. के प्रतापन, कुलसचिव डॉ. लोकेश गंभीर और अन्य संकाय के सदस्यों सहित हजारों छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। आशा भोसले को समर्पित अध्याय ने इस मंच को भावुकता से भर दिया। द्वितीय दिन जब उनकी आवाज गूंज उठी, तो संगीनी उच्छ्वास में डूब गईं और उपस्थित लोग छूटे हुए रागों में खो गए।
इस आयोजन का उद्देश्य न केवल संगीत के प्रति प्रेम को बढ़ाना था, बल्कि भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति युवाओं की रुचि को भी जगाना था।
इस अद्वितीय रात ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सच्चा संगीत दिलों में जीवन भर जीवित रहता है, और यह किसी भी समय और स्थान पर लोगों के बीच जादू बिखेर सकता है।
इस महोत्सव ने न केवल मनोरंजन प्रदान किया बल्कि प्रेम के भावों, आधुनिक रिश्तों, और जेनर्ल गेंसरेशन के सभी पहलुओं को भी उजागर किया।
इस महान आयोजन ने प्रतिभागियों के दिलों को जोड़ा और वह क्षण अविस्मरणीय बना। आगे भी इसी प्रकार के कार्यक्रम होते रहें तो युवाओं को अपने संस्कृति व संगीत से जोड़ने का एक बड़ा अवसर मिलता रहेगा।
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