भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल और उत्तराखंड औद्यानिक परिषद के बीच MoU: जवानों को मिलने वाले ताज़े फल एवं सब्जियाँ
1 April 2026. Dehradun. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में ‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम’ के अंतर्गत भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) की उत्तराखंड में तैनात Continue Reading » The post भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल और उत्तराखंड औद्यानिक परिषद के मध्य समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर, जवानों को उपलब्ध होंगे ताज़े फल एवं सब्जियां appeared first on Mirror Uttarakhand.
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल और उत्तराखंड औद्यानिक परिषद के बीच MoU: जवानों को मिलने वाले ताज़े फल एवं सब्जियाँ
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में उत्तराखंड में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) के जवानों के लिए ताज़े फल और सब्जियों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
1 अप्रैल 2026 को, देहरादून में मुख्यमंत्री आवास में हुए इस समझौते का मुख्य उद्देश्य आईटीबीपी के जवानों की खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को बढ़ाना और स्थानीय किसानों को उचित मूल्य प्रदान करना है। इस पहल के पीछे 'वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम' का योगदान है, जो सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास का उल्लेख करता है।
समझौते की अहमियत
मुख्यमंत्री धामी ने इस समझौते को राज्य के किसानों और स्थानीय उत्पादकों की भलाई के लिए एक अहम कदम बताया। उन्होंने कहा, "इस समझौते के माध्यम से, हमारे जवानों को उच्च गुणवत्ता वाली और पोषक खाद्य सामग्री उपलब्ध होगी, साथ ही किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।"
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
इस पहल से न केवल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों को मार्केट समझने और प्रवृत्तियों का फायदा उठाने का एक स्थायी मंच भी मिलेगा। चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
आर्थिक स्थिति में सुधार
सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए यह समझौता सहायक होगा, साथ ही उन्हें बाजार तक पहुँचने में आने वाली कठिनाइयों से राहत मिलेगी। राज्य सरकार ने अपने जवानों और किसानों के कल्याण के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
पिछले समझौतों का प्रभाव
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत पहले भी समझौते किए गए हैं, जिनके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। अब तक आईटीबीपी ने 14 करोड़ 77 लाख रुपये के स्थानीय उत्पादों की खरीद की है, और इस प्रयास को और बढ़ाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। यदि आईटीबीपी वार्षिक मांग का 25 प्रतिशत ताज़े फल और सब्जियाँ खरीदती है, तो इससे स्थानीय किसानों को लगभग 6 करोड़ रुपये की आमदनी हो सकती है।
उपस्थित dignitaries
इस महत्वपूर्ण अवसर पर कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी, कृषि सचिव श्री एस.एन. पाण्डेय, आईजी आईटीबीपी श्री मनु महाराज, अपर सचिव श्री आनन्द श्रीवास्तव, निदेशक उद्यान श्री एस.एल. सेमवाल और औद्यानिक परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री नरेन्द्र कुमार यादव भी उपस्थित थे।
इस समझौते से स्पष्ट होता है कि स्थानीय उत्पादों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता भी बढ़ रही है, जो न केवल जवानों की भलाई का ध्यान रखती है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के किसानों के विकास में भी योगदान देती है।
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सादर,
टीम हकीकत क्या है,
सुनीता शर्मा
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