राहुल कोटियाल को मिला प्रतिष्ठित पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार
The post राहुल कोटियाल को मिला पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार appeared first on Avikal Uttarakhand. पत्रकारों को अपनी प्रहरी की भूमिका नहीं भूलनी चाहिए-भारत भूषण अविकल उत्तराखण्ड देहरादून,। वरिष्ठ पत्रकार एवं ऑनलाइन पोर्टल ‘बारामासा’ के संस्थापक संपादक राहुल कोटियाल को उनकी निष्पक्ष, बेबाक और साहसी… The post राहुल कोटियाल को मिला पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार appeared first on Avikal Uttarakhand.
राहुल कोटियाल को मिला प्रतिष्ठित पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार
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कम शब्दों में कहें तो: वरिष्ठ पत्रकार राहुल कोटियाल को उनके साहसिक और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो उनकी जिम्मेदारियों को और बढ़ाता है।
देहरादून, 19 मई। वरिष्ठ पत्रकार एवं ऑनलाइन पोर्टल ‘बारामासा’ के संस्थापक संपादक राहुल कोटियाल को उनकी निष्पक्ष, बेबाक और साहसी पत्रकारिता के लिए चौथे पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार कर्मभूमि फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया गया है, जिसमें एक लाख रुपये की धनराशि, शॉल और प्रशस्ति पत्र शामिल है।
समारोह का आयोजन
यह समारोह दून लाइब्रेरी में आयोजित किया गया, जहाँ वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘मेल टुडे’ के संस्थापक संपादक भारत भूषण मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई और फाउंडेशन के सचिव कैप्टन हिमांशु धूलिया ने पंडित भैरव दत्त धूलिया के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका, और ‘कर्मभूमि’ समाचार पत्र के संपादक के रूप में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
पत्रकारिता में मिशनरी भावना का महत्व
कवि एवं सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश नवानी ने पत्रकारिता में मिशनरी भावना को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिए। उन्होंने कहा कि मीडिया का दायित्व उन लोगों की आवाज बनना है, जो स्वयं अपनी बात नहीं रख सकते। इसके बाद, कर्मभूमि फाउंडेशन के सचिव हिमांशु धूलिया ने पुरस्कार प्रशस्ति पत्र का वाचन किया और मुख्य अतिथि ने राहुल कोटियाल को सम्मान प्रदान किया।
राहुल कोटियाल का दृष्टिकोण
सम्मान मिलने के बाद, राहुल कोटियाल ने कहा कि यह पुरस्कार उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ाता है। उन्होंने स्वतंत्र और ईमानदार पत्रकारिता के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की स्थिति यह हो गई है कि अखबारों के लिए विज्ञापन नहीं, बल्कि विज्ञापनों के लिए अखबार बनाए जा रहे हैं। उन्होंने अपने परिवार और सहयोगियों का भी आभार व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि की चर्चाएँ
मुख्य अतिथि भारत भूषण ने पत्रकारिता में विचारधारा की भूमिका और बदलते मीडिया परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक भारत में पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं थी, बल्कि जनजागरण का एक प्रभावशाली साधन भी थी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी विज्ञापनों पर निर्भरता मीडिया में आत्म-सेंसरशिप को बढ़ावा देती है।
उन्होंने यह भी समझाया कि पत्रकारों को अपनी प्रहरी की भूमिका नहीं भूलनी चाहिए और समाचार, विश्लेषण और विचार को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। अंत में, कर्मभूमि फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती धूलिया ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
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योगिनी कुमारी
Team Haqiqat Kya Hai
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