उत्तराखंड में नए शिक्षा मॉडल की शुरुआत: मदरसा बोर्ड का समापन और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन

The post मदरसा बोर्ड समाप्त कर बना नया शिक्षा मॉडल- मुख्यमंत्री धामी appeared first on Avikal Uttarakhand. अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ उत्तराखण्ड में शिक्षा सुधार का नया अध्याय शुरू अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को प्रदान किए गए मान्यता प्रमाण पत्र ” वन नेशन-वन एजुकेशन” की दिशा में… The post मदरसा बोर्ड समाप्त कर बना नया शिक्षा मॉडल- मुख्यमंत्री धामी appeared first on Avikal Uttarakhand.

Jul 1, 2026 - 18:39
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उत्तराखंड में नए शिक्षा मॉडल की शुरुआत: मदरसा बोर्ड का समापन और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन
उत्तराखंड में नए शिक्षा मॉडल की शुरुआत: मदरसा बोर्ड का समापन और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन

उत्तराखंड में नए शिक्षा मॉडल की शुरुआत: मदरसा बोर्ड का समापन और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मदरसा बोर्ड को समाप्त कर एक नया शिक्षा मॉडल लागू किया है जो अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के माध्यम से संचालित होगा।

देहरादून में आयोजित समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल "वन नेशन-वन एजुकेशन" की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान शैक्षणिक अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ

मुख्यमंत्री धामी ने कार्यकम में प्रदेश के विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए। यह प्राधिकरण उत्तराखंड में शिक्षा सुधार का नया अध्याय खोलेगा और सभी समुदायों को एक समान शैक्षणिक अवसर सुनिश्चित करेगा।

शिक्षा को विकास का आधार बनाने की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक समाज को सशक्त बनाने के लिए किताब-कॉपी और कौशल को प्राथमिकता दी जाएगी। शिक्षा को विकास का आधार माना जाएगा और इसे गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और सशक्त बनाया जाएगा।

राजनीति से परे, बच्चों के भविष्य पर ध्यान

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्राधिकरण केवल एक संस्था की शुरुआत नहीं, बल्कि सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव टिकाने वाला कदम है। इसकी स्थापना से शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और पारदर्शिता का महत्वपूर्ण योगदान होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का प्रभावी क्रियान्वयन

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप होगी, जिसमें सभी वर्गों को बराबरी का अवसर दिया जाएगा। उनका कहना था कि यह नीति केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कौशल विकास और उद्यमिता पर जोर दिया जाएगा।

प्रौद्योगिकी और आधुनिक शिक्षा की राह

धामी ने जोर देकर कहा कि आज का युग ज्ञान, नवाचार और तकनीक का है। इसलिए जरूरी है कि राज्य का हर बच्चा विकास की यात्रा में पीछे न छूटे। वह सभी बच्चों को विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और कौशल विकास में दक्षता प्राप्त करने का अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

सांस्कृतिक जड़ों के साथ आधुनिकता की दृष्टि

मुख्यमंत्री ने बताया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी खास समुदाय की पहचान या परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं है, बल्कि इसे सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

उम्मीद की किरण: भविष्य में सकारात्मक परिवर्तन

मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में यह प्राधिकरण हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उत्तराखंड को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनाएगा।

धामी ने सभी धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की कि वे इस पहल को सफल बनाने में सहयोग करें। यह कार्यक्रम राज्य के सभी वर्गों के विकास के लिए एक नई शुरुआत है।

इस अवसर पर उपस्थित जन प्रतिनिधियों में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा, एवं विभिन्न शिक्षाविद शामिल थे।

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— टीम हक़ीक़त क्या है, राधिका शर्मा

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