दूरदर्शन केंद्र का 26वां स्थापना दिवस: भारतीय संस्कृति का भूमि पर गौरवगाथा

The post दूरदर्शन केंद्र का 26 वाँ स्थापना दिवस मनाया गया appeared first on Avikal Uttarakhand. – सांस्कृतिक संध्या पर दूरदर्शन की गौरवशाली सार्वजनिक प्रसारण परंपरा के साथ उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत, लोकसंगीत एवं लोकनृत्य की दिखी झलक – दूरदर्शन केंद्र, देहरादून के 26 वर्षों… The post दूरदर्शन केंद्र का 26 वाँ स्थापना दिवस मनाया गया appeared first on Avikal Uttarakhand.

Aug 13, 2026 - 09:39
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दूरदर्शन केंद्र का 26वां स्थापना दिवस: भारतीय संस्कृति का भूमि पर गौरवगाथा
दूरदर्शन केंद्र का 26वां स्थापना दिवस: भारतीय संस्कृति का भूमि पर गौरवगाथा

दूरदर्शन केंद्र का 26वां स्थापना दिवस: भारतीय संस्कृति का भूमि पर गौरवगाथा

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कम शब्दों में कहें तो, दूरदर्शन केंद्र देहरादून ने अपने 26 वर्षों के स्थापना दिवस का आयोजन एक भव्य सांस्कृतिक संध्या के रूप में किया। यह समारोह न केवल दूरदर्शन की गौरवशाली प्रसारण परंपरा का जश्न था बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण मंच भी बना।

इस कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति विभाग सभागार में किया गया, जहां भारतीय मानक ब्यूरो के निदेशक हेमंत बी.आडे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर दूरदर्शन और प्रसार भारती परिवार के साथ-साथ पद्म पुरस्कार से सम्मानित विशिष्ट अतिथियों और आमंत्रित कलाकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की विशेषताएं

कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ, जो इस समारोह के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है। कार्यक्रम के दौरान, सुखद और दिलकश सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी रहीं। विपुल रूहेला ने वाद्य-वृंद के साथ ग़ज़ल प्रस्तुत किया, वहीं डॉ. रेशमा शाह एवं दल ने जौनसारी गीतों से सबका मन मोह लिया।

सनव्वर अली खान और शाहरुख खान का लाइट म्यूजिक, सौरव मैठाणी का गढ़वाली गीत, और पिथौरागढ़ की भाव-राग नाट्य अकादमी द्वारा प्रस्तुत हिल-जात्रा नृत्य ने इस सांस्कृतिक संध्या को और भी रंगीन बना दिया। अंत में, लता तिवारी पांडे के कुमाऊँनी गीत ने सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सांस्कृतिक धरोहर का प्रर्दशन

इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक-सांस्कृतिक विरासत, लोकसंगीत एवं लोकनृत्य की विविधता को प्रमोट करना भी था। यह एक महत्वपूर्ण पहल है, जो युवा पीढ़ी को हमारे सांस्कृतिक धरोहर की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कार्यक्रम दौरान सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया, जिससे युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया गया। अंत में, दूरदर्शन केन्द्र के कार्यक्रम प्रमुख अनिल कुमार भारती ने सभी का आभार व्यक्त किया।

दूरदर्शन के 26 वर्षों की यात्रा

दूरदर्शन केंद्र, देहरादून ने 26 वर्षों में जो सेवा की है, वह न केवल विश्वसनीय प्रसारण परंपरा का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रसार के प्रति भी दृढ़ प्रतिबद्धता का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

यह सांस्कृतिक संध्या एक ऐसा मंच थी जो न केवल दूरदर्शन की विश्वसनीयता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे माध्यम सांस्कृतिक विकास में योगदान कर सकते हैं।

संसाधनों के सीमित होने के बावजूद, दूरदर्शन ने यह साबित किया है कि वे अपनी संस्कृति को न केवल जीवित रख सकते हैं, बल्कि उसे और भी ज्यादा विकसित कर सकते हैं।

इस कार्यक्रम ने सभी को यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना न केवल एक जिम्मेदारी है, बल्कि यह हमारी पहचान का अभिन्न हिस्सा है।

यह आयोजन विस्तृत लाभ और प्रेरणा प्रदान करता है, यह दर्शाता है कि हम सब मिलकर हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई ऊँचाइयों पर ले जा सकते हैं।

इसके अलावा, इस दिन की खासियत यह थी कि यह न केवल एक समारोह था, बल्कि यह एक आंदोलन भी था जो हमें हमारी संस्कृति को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रेरित कर रहा था।

अंत में, हम सभी को चाहिए कि हम दूरदर्शन के इस प्रयास का समर्थन करें और इसे आगे बढ़ाने में सहयोग दें।

आपकी अधिक जानकारी के लिए, यहाँ पर जाएं.

सादर, Team Haqiqat Kya Hai

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