‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’- जीवंत हुई भारतीय लोक एवं जनजातीय कला

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Aug 28, 2026 - 18:39
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‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’- जीवंत हुई भारतीय लोक एवं जनजातीय कला

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श्रेष्ठ पांच विजेता कलाकारों को 25-25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी), प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ लोक एवं जनजातीय कला कार्यशाला, प्रदर्शनी एवं चित्रकला प्रतियोगिता में करीब 50 कलाकारों ने अपने हुनर का जादू बिखेरा। इस आयोजन ने भारतीय लोक एवं जनजातीय कला की विविध परंपराओं को मंच प्रदान करने के साथ कला, संस्कृति और राष्ट्रभावना का प्रभावशाली संगम प्रस्तुत किया।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक गायिका एवं पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने कहा कि चित्रकला केवल एक विधा नहीं, बल्कि कला-साधना है। लोक कला हमें प्रकृति और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए कलाकार जैसी संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण आवश्यक है। एक कलाकार के भीतर सकारात्मक सोच और समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है। कला से जुड़े लोगों की यही सकारात्मक भावना समाज और संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कला समाज में सहयोग, संवाद और आपसी जुड़ाव की भावना को मजबूत करती है।

विशिष्ट अतिथि रंगकर्मी डॉ. राकेश भट्ट ने कहा कि लोक भाषा, लोक संगीत और लोक कला समाज की आत्मा हैं, इसलिए इनके संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य की लोक विधाओं को जीवंत बनाए रखने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। युवा पीढ़ी अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति को समझे और उसे आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाए, तभी लोक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकेगा।

ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की कुलसचिव डॉ. छाबड़ा ने आयोजन को विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि एनसीजेडसीसी, प्रयागराज के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों, कला प्रेमियों और आमजन को भारतीय लोक एवं जनजातीय कला की विविधता को करीब से समझने का अवसर प्रदान किया।

आयोजन के समन्वयक डॉ कृष्ण कुमार ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य देश की समृद्ध लोक एवं जनजातीय कला परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना रहा। कार्यशाला के दौरान कलाकारों ने अपनी विशिष्ट कला शैलियों में चित्र एवं अन्य कलाकृतियों का सृजन किया। विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों को एक-दूसरे की कला परंपराओं, तकनीकों और रचनात्मक दृष्टिकोण को समझने तथा अनुभव साझा करने का अवसर भी मिला।

चित्रकला प्रतियोगिता इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। प्रतिभागियों की रचनाओं में भारतीय सांस्कृतिक विरासत, लुप्त होती कला शैलियों, प्रकृति, लोकजीवन, मातृभूमि के प्रति सम्मान और भारतीय जीवन मूल्यों की सशक्त झलक देखने को मिली। प्रतियोगिता में श्रेष्ठ पांच चित्रों का चयन किया गया। पांचों विजेता कलाकारों विशाखा गुंज्याल,
मानवी सलाथिया,
मीरा चौहान,
आरुषि सेमवाल और
हर्षदीप कौर को 25-25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया। प्रत्येक प्रतिभागी कलाकार को एनसीजेडसीसी की तरफसे 2100 की सम्मान राशि भी दी जा रही है।

कार्यशाला के समन्वयक डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि आयोजन एनसीजेडसीसी, प्रयागराज के निदेशक सुदेश शर्मा के निर्देशन में संपन्न हुआ। ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ की केंद्रीय थीम को ध्यान में रखते हुए कलाकारों ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं, प्रकृति और लोकजीवन के विविध आयामों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से अभिव्यक्त किया। विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. आलोक तीर्थ भौमिक और नीलम जयाला शामिल हुए, जबकि निर्णायक मंडल में डॉ. अंजलि थापा और डॉ. शशि झा रहे।

इस आयोजन की नोडल अधिकारी डॉ मंदाकिनी शर्मा ने कहा कि इस आयोजन ने पारंपरिक कला विधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन तथा युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल प्रस्तुत की। कार्यशाला में हिस्सा ले रहे छात्र-छात्राओं ने कहा कि ये हमारे लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का सुंदर मंच है। विद्यार्थियों ने कहा कि हमें इस बात की बेहद खुशी है कि कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला।

इस अवसर पर ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के फाइन आर्ट्स विभाग के अध्यक्ष प्रो. आनंद कर्मकार, डॉ. नीलोत्पल, प्रो. एसके सरकार, डॉ. अनिर्बन, डॉ. कपिल कुमार, डॉ. श्रेयसी और डॉ. अजीत कुमार, एन सी जेड सी सी प्रयागराज से अजय गुप्ता , राजपाल पांचाल, भूपेंद्र भवानी, मंथन कुमार और राशिका सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक, शोधार्थी ,विद्यार्थी एवं कला प्रेमी मौजूद रहे।

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