देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम, उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण उपस्थिति
19 August 2026. Dehradun. वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी हैं: मुख्यमंत्री इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाते हुए विकास को आगे बढ़ाना सरकार की Continue Reading » The post देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री रहे मौजूद appeared first on Mirror Uttarakhand.
देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वनों के संरक्षण और विकास के तरीकों पर चर्चा करना था।
19 अगस्त 2026 को, देहरादून में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं होते, बल्कि प्रकृति के सच्चे रक्षक होते हैं। इस अवसर पर, भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री का स्वागत और उनकी बातें
मुख्यमंत्री धामी ने उपराष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि उनका जीवन समाज सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने उनकी यात्रा को युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बताया, जो कि जमीनी स्तर से शुरू होकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंची।
वन सेवाओं का महत्व
मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन सेवा का कार्य केवल वनों का संरक्षण करना नहीं है, बल्कि यह देश की जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र वनच्छादित है, और यह प्राकृतिक धरोहर हमारी पहचान है। वनों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय
मुख्यमंत्री धामी ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए वन अधिकारियों की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने परिवीक्षार्थियों को सुझाव दिया कि वे आधुनिक तकनीकी का उपयोग करते हुए वन संरक्षण और स्थानीय समुदाय के हितों को प्राथमिकता दें।
सरकार की योजनाएं और प्रयास
उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों की जानकारी दी, जैसे कि अवैध कब्जों से वन भूमि को मुक्त कराना, जैव विविधता के संरक्षण के लिए तकनीकी उपायों का प्रयोग करना और राजाजी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रयास।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में वन उपज के लिए नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम स्थापित किया गया है। साथ ही, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए कई योजनाएँ कार्यान्वित की गई हैं।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास जताया कि युवा वन अधिकारी अपने कार्यों में संतुलन स्थापित करने के लिए काम करेंगे और पर्यावरण की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उनका विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकल्प रहित संकल्प' के अनुसार, युवा अधिकारी देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में अहम भूमिका निभाएंगे।
इस संवाद कार्यक्रम ने न केवल वन सेवाओं के महत्व को उजागर किया बल्कि यह भी दर्शाया कि कैसे वन अधिकारी प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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लेखक: सविता शर्मा
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