हिमालय के ऐतिहासिक चित्रों की प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन

The post हिमालय से साक्षात्कार करती चित्र प्रदर्शनी का शुभारम्भ appeared first on Avikal Uttarakhand. अविकल उत्तराखंड देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में शुक्रवार की शाम जर्मन के श्लागिंटवाईट बन्धुओं की निर्मित 170 साल पुराने चित्रों की प्रदर्शनी का शुभारम्भ हुआ। पहाड़ संस्था के… The post हिमालय से साक्षात्कार करती चित्र प्रदर्शनी का शुभारम्भ appeared first on Avikal Uttarakhand.

May 2, 2026 - 00:39
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हिमालय के ऐतिहासिक चित्रों की प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन
हिमालय के ऐतिहासिक चित्रों की प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन

हिमालय के ऐतिहासिक चित्रों की प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में 170 साल पुराने जर्मन चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया है। यह प्रदर्शनी जनता के लिए हिमालय के अद्भुत दृश्यों का अनूठा परिचय देगी।

देहरादून: शुक्रवार की शाम को दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में एक विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया, जिसमें जर्मन के श्लागिंटवाईट बंधुओं द्वारा रचित 170 साल पुराने चित्र प्रदर्शित किए गए। इस भव्य समारोह का आयोजन पहाड़ संस्था के प्रो. शेखर पाठक की पहल पर किया गया। इन चित्रों का संग्रह जर्मनी के म्यूनिख संग्रहालय से निकाला गया है, जिससे आम जन तक हिमालय की खूबसूरत छवियाँ पहुँच सकें।

इस प्रदर्शनी में म्यूनिख संग्रहालय के साथ-साथ श्लांगिटवाइट परिवार के सदस्यों, प्रो. हरमन क्रुत्जमैन, मैडम स्टेफनी क्लेइट और स्टीफन रिट्टर का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

प्रदर्शनी की यात्रा

दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर से शुरू होकर यह प्रदर्शनी अब देहरादून में स्थित दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र तक पहुँची है। इसके बाद, यह नैनीताल के सीआरएसटी कॉलेज में प्रदर्शित की जाएगी। प्रदर्शनी में शामिल चित्र जम्मू-कश्मीर से लेकर बदरीनाथ, केदारनाथ, मिलम, सुंदरढूंगा, नैनीताल और दार्जिलिंग तक के ऐतिहासिक दृश्यों को दर्शाते हैं, जिससे दर्शक सीधे साक्षात्कार कर सकें।

इस प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शक लगभग पौने दो सौ साल पुराने हिमालय के अलग-अलग स्थानीय भू-दृश्यों, जैसी खड़ी नदियाँ, ऊँचे पर्वत, मंदिर, पुल और रास्तों की झलक देख सकेंगे। इन चित्रों में दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ाने की अद्भुत क्षमता है।

हिमालय के ऐतिहासिक चित्र

कार्यक्रम का महत्व

इस आयोजन में प्रो. शेखर पाठक और प्रो. हरमन क्रुत्जमैन ने अपनी-अपनी दृष्टिकोण साझा किए। प्रो. पाठक ने बताया कि भारत में इस प्रदर्शनी का विचार सितंबर 2015 में म्यूनिख में आयोजित एक संगोष्ठी के दौरान आया था, जिसमें श्लांगिटवाइट के अभियानों पर चर्चा हुई थी।

उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी में एक अत्यंत बड़े संग्रहालय की प्रदर्शनी भी मौजूद थी, जिसमें विभिन्न कलाकृतियाँ, मुखौटे, नृवंशविज्ञान से जुड़ी वस्तुएं, मानचित्र, माप और अभिलेख शामिल थे।

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के संस्थापक प्रो. बी.के. जोशी ने सभी उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रदर्शनी इतिहासकारों, भूगोलवेताओं और समाज विज्ञानियों के लिए बेहद यथार्थ साबित होगी। एन. रविशंकर ने भी प्रदर्शनी को ज्ञानवर्धक और सूचना के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम के दौरान

प्रदर्शनी की अवधि

यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए 1-8 मई, 2026 तक दून पुस्तकालय के तृतीय तल में प्रातः 11 बजे से सायं 6:30 बजे तक निशुल्क रूप से उपलब्ध रहेगी। कार्यक्रम के संचालन का जिम्मा डॉ. लोकेश ओहरी ने संभाला। प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर लोक कलाकार रामचरण जुयाल ने मोंछंग बजाकर उपस्थित जनों का मनोरंजन किया।

इस अवसर पर कई प्रबुद्ध नागरिक, जैसे पूर्व सचिव उत्तराखंड, नृप सिंह नपलच्याल, डॉ. पंकज नैथानी, और अन्य विद्वान शामिल हुए।

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इस प्रदर्शनी का विस्तार अनेक क्षेत्रों में ज्ञान और समझ प्रदान करेगी।

सादर, टीम हक़ीक़त क्या है - सुमित्रा कौर

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