हरेला पर्व: प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त जनआंदोलन
16 July 2026. Dehradun. हरेला पर पूरे प्रदेश में 10 लाख पौधे लगाने का संकल्प, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान लोक संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और Continue Reading » The post हरेला केवल पर्व नहीं, प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का जनआंदोलन है : मुख्यमंत्री appeared first on Mirror Uttarakhand.
हरेला पर्व: प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त जनआंदोलन
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कम शब्दों में कहें तो, हरेला पर्व केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा महापर्व है।
16 जुलाई 2026 को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला पर्व के अवसर पर पूरे प्रदेश में 10 लाख पौधे लगाने का संकल्प लेने के साथ ही ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
प्रकृति और संस्कृति का संगम
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि हरेला पर्व उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, "यह पर्व सभी वर्गों को एक साथ लाने वाला है।" राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा इस पर्व में बढ़-चढ़कर भागीदारी भी इसका स्पष्ट उदाहरण है।
सांस्कृतिक विरासत का महापर्व
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि हरेला पर्व लोक परंपराओं का एक महापर्व है, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को गहराई से जोड़ता है। स्थानीय कलाकारों और हस्तशिल्प कारीगरों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के कार्यों की सराहना भी की, जिन्होंने अपनी आवाज़ से उत्तराखंड की संस्कृति को एक नई पहचान दी है।
वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला सिर्फ एक त्यौहार नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी का संकल्प भी है। उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह पर्व एक वैश्विक संदेश देता है।
इस संबंध में, राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में 10 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य की दिशा में कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा, "प्रत्येक पौधा पर्यावरण संरक्षण और विकास का प्रतीक है।"
जनआंदोलन का हिस्सा बनें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए जा रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत, मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे अपनी माता के सम्मान में एक पौधा अवश्य लगाए और उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प लें। उत्तराखंड में दो करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक लगभग 1 करोड़ 15 लाख पौधे लगाये जा चुके हैं, जो नागरिकों की जागरूकता का प्रतीक है।
स्थानीय कलाकारों को मिल रहा बल
मुख्यमंत्री ने बताया कि लोक संवर्धन पर्व का आयोजन न केवल स्थानीय व्यवसायों की सहायता करेगा, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का भी एक प्रभावी उपाय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आयोजन लोक कलाकारों और उद्यमियों के लिए नए अवसरों का सृजन करेगा, जिससे उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को नई पहचान मिलेगी।
सभी को किया गया आमंत्रित
समारोह में कैबिनेट मंत्री श्री खजान दास, देहरादून के मेयर श्री सौरभ थपलियाल, प्रसिद्ध लोकगायक श्री नरेंद्र सिंह नेगी, विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में आम जनता भी शामिल हुई। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अपने परिवारों के साथ इस लोक संवर्धन पर्व में भाग लें और उत्तराखंड की लोक कला, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित एवं बढ़ाने का प्रयास करें।
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इस प्रकार, हरेला पर्व न केवल एक त्यौहार है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण प्रदान करने वाला एक सशक्त जनआंदोलन भी है।
सादर,
टीम हकीकत क्या है, ऋतुजा
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