साम्प्रदायिक घृणा के खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता
The post साम्प्रदायिक घृणा फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग appeared first on Avikal Uttarakhand. सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से डीएम और एसएसपी से की मुलाकात अविकल उत्तराखंड देहरादून। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने देहरादून के डीएम और… The post साम्प्रदायिक घृणा फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग appeared first on Avikal Uttarakhand.
साम्प्रदायिक घृणा के खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Haqiqat Kya Hai
कम शब्दों में कहें तो: विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने देहरादून में साम्प्रदायिक घृणा फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए कहा गया कि यदि त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे।
देहरादून, उत्तराखंड - विगत दिनों, विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने देहरादून के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से मुलाकात की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य साम्प्रदायिक घृणा को फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करना था। प्रतिनिधियों ने बताया कि देहरादून जिले में 6 से 7 ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो नफरत फैलाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर विशाल प्रदर्शन करेंगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कहा कि यह उनकी पहली नियुक्ति है और वे इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे। एसएसपी प्रमेन्द्र डोवाल ने कहा कि इस मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ पहले से मामला दर्ज है और बाकी लोगों के खिलाफ भी त्वरित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, प्रतिनिधियों ने चिंता व्यक्त की कि अभियुक्तों के नामजद मुकदमे दर्ज करने की बजाय, अक्सर अज्ञात लोगों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज की जाती हैं।
ज्ञापन में उठाए गए मुद्दे
प्रतिनिधियों ने एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें बैरागीवाला में विनोद कुमार के सभी हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि हाल ही में बैरागीवाला में कुछ साम्प्रदायिक तत्वों ने घृणा फैलाने का प्रयास किया था। यहां तक कि पुलिस पर भी पथराव किया गया। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि ललित शर्मा नाम के व्यक्ति ने घृणा भरी बयानों की श्रृंखला में बेहद आपत्तिजनक बातें कहीं हैं, जैसे कि मुस्लिम महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चों को मारने की बात करना। यह स्पष्ट रूप से आपराधिक इरादे को दर्शाता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण आदेश का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कहा गया था कि हेट स्पीच के मामलों में पुलिस को शिकायत का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। हालिया घटनाओं से यह साफ होता है कि नफरत फैलाने वालों के चेहरे पहचाने जाने के बावजूद कई बार अज्ञात के खिलाफ ही शिकायतें दर्ज की जाती हैं।
प्रतिनिधि मंडल की संरचना
प्रतिनिधि मंडल में कई प्रमुख समाजसेवी शामिल थे, जिनमें उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, निर्मला बिष्ट, विमला कोली, मंजू बलौदी, उत्तराखंड इंसानियत मंच के हरिओम पाली, त्रिलोचन भट्ट, भारत ज्ञान-विज्ञान समिति के कमलेश खंतवाल, चेतना आंदोलन के राजेन्द्र शाह, और कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।
समाज में नफरत फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ उठाई गई आवाज को सुनना अत्यंत आवश्यक है। हम सभी को मिलकर इस भावना को समाप्त करने के लिए प्रयासरत रहना होगा।
अधिक जानकारी और ताजातरीन अपडेट के लिए यहां क्लिक करें.
टीम हकीकत क्या है, प्रियंका शर्मा
What's Your Reaction?