उत्तराखंड भाजपा में अंदरूनी सर्वे के बाद उठे सवाल, 32 विधायकों की टिकट काटने की तैयारी

DEHRADUN: जंतर मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन और हाल में उफचुनाव के नतीजों का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। जिस वक्त भाजपा बिहार की बांकीपुर सीट से चुनाव हारने का सदमा झेल रही थी, तकरीबन उसी वक्त उत्तराखंड भाजपा के एक आंतरिक सर्वे ने भी उथल पुथल मचा दी। दरअसल पार्टी और […] The post अंदरूनी सर्वे ने  भाजपा में मचाई उथल पुथल, 32 विधायकों के कट सकते हैं टिकट,  सीएम को भी सेफ सीट की तलाश appeared first on Devbhoomi Dialogue.

Aug 6, 2026 - 18:39
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उत्तराखंड भाजपा में अंदरूनी सर्वे के बाद उठे सवाल, 32 विधायकों की टिकट काटने की तैयारी
उत्तराखंड भाजपा में अंदरूनी सर्वे के बाद उठे सवाल, 32 विधायकों की टिकट काटने की तैयारी

अंदरूनी सर्वे ने भाजपा में मचाई उथल पुथल, 32 विधायकों के कट सकते हैं टिकट, सीएम को भी सेफ सीट की तलाश

DEHRADUN: जंतर मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन और हाल में उपचुनाव के नतीजों का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। जबकि भाजपा बिहार की बांकीपुर सीट से चुनाव हारने का सदमा झेल रही थी, उत्तराखंड भाजपा में हुए एक आंतरिक सर्वे ने भी उथल-पुथल मचाई है।

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड भाजपा के आंतरिक सर्वे में 32 विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी दर्ज की गई है, जिससे उनकी टिकटें काटने की संभावना बनी हुई है।

सर्वे का विस्तृत परिचय

पार्टी और संघ की ओर से राज्य की सभी 47 सीटों पर एक व्यापक आंतरिक सर्वे कराया गया। सूत्रों के अनुसार, पिछले दो महीनों में राज्य की सभी 70 सीटों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं, महत्वपूर्ण हस्तियों और सामान्य लोगों से संवाद कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई।

विधायकों की टिकटें संकट में

इस सर्वे ने सिटिंग विधायकों की नींद उड़ा दी है। भाजपा के 32 विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन विधायकों को पुनः टिकट दिया गया, तो पार्टी को विपक्ष में बैठने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इसलिए इन 32 विधायकों की टिकटों पर संशय बना हुआ है।

स्थानीय स्तर पर भाजपा के कामकाज पर नाराजगी

हालांकि, सर्वे रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि सरकार के प्रति लोगों का गुस्सा इतना नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर विधायकों के कामकाज को लेकर है। लोग मानते हैं कि भाजपा के दस साल के शासन में कुछ अच्छे विकास कार्य हुए हैं, लेकिन इस दौरान स्थानीय विरोध की आवाज भी उठी है।

भारत की चुनावी रणनीति

भाजपा नेतृत्व वर्तमान में ऐसी सीटों की तलाश कर रहा है जो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए सुरक्षित हों। यह भी ध्यान देने योग्य है कि धामी ने पिछले चुनाव में खटीमा से हारने के बाद उपचुनाव में चंपावत सीट से जीत हासिल की थी।

भविष्य की संभावनाएँ

सूत्रों के अनुसार, राज्य में विपक्ष के मजबूत या कमजोर होने का परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ता। मुख्य मुद्दा स्थानीय स्तर पर नाराजगी का होता है। इसे ध्यान में रखते हुए, भाजपा इस बार कांग्रेस को हल्के में न लेकर चलने का निर्णय ले सकती है।

इस बीच, भाजपा उत्तराखंड प्रदेश कोर ग्रुप की एक अहम बैठक नई दिल्ली में हो रही है, जिसमें आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट पर भी चर्चा की जाएगी। अब यह देखना रोचक होगा कि क्या इस सर्वे के आधार पर टिकटों का बंटवारा करने का निर्णय लिया जाता है?

संपन्नता की दिशा में कदम

भाजपा के सामने अब एक चुनौती है - यदि वास्तव में 32 टिकट काटे जाते हैं, तो पार्टी में असंतोष उभर सकता है। इसलिए, पार्टी को अपना आंतरिक सर्वे और रणनीति दोनों पर सावधानी से विचार करना होगा।

अंत में, आने वाले चुनावों की दृष्टि से भाजपा के लिए यह समय महत्वपूर्ण है। पार्टी की एकजुटता और विधायकों की चुनावी स्थिति पर ध्यान देना आवश्यक होगा।

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स्रोत: Haqiqat Kya Hai | Team Haqiqat Kya Hai (by Priya)

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