उत्तराखंड: ‘जन जन की सरकार-जन जन के द्वार’ कार्यक्रम का दूसरा चरण, 1.34 लाख लोगों की भागीदारी

जन समस्या निराकरण और आम आदमी तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए चलाए जा रहे ‘जन जन की सरकार-जन जन के द्वार’ कार्यक्रम के दूसरे चरण में अब तक 1.34 लाख से अधिक लोगों ने भागीदारी हो चुकी है। इसी के साथ अभियान के प्रथम और दूसरे चरण को मिलाकर,कुल जनभागीदारी साढ़े 6 […] The post Uttarakhand:-‘जन जन की सरकार-जन जन के द्वार’ कार्यक्रम के दूसरे चरण में 1.34 लाख लोगों की भागीदारी appeared first on संवाद जान्हवी.

Aug 3, 2026 - 00:39
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उत्तराखंड: ‘जन जन की सरकार-जन जन के द्वार’ कार्यक्रम का दूसरा चरण, 1.34 लाख लोगों की भागीदारी
उत्तराखंड: ‘जन जन की सरकार-जन जन के द्वार’ कार्यक्रम का दूसरा चरण, 1.34 लाख लोगों की भागीदारी

उत्तराखंड: ‘जन जन की सरकार-जन जन के द्वार’ कार्यक्रम का दूसरा चरण, 1.34 लाख लोगों की भागीदारी

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में ‘जन जन की सरकार-जन जन के द्वार’ कार्यक्रम के दूसरे चरण में 1.34 लाख से अधिक लोग भाग ले चुके हैं। यह कार्यक्रम जन समस्याओं के समाधान और आम लोगों तक सरकारी योजनाओं के लाभ को पहुँचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। पहले और दूसरे चरण मिलाकर, कुल भागीदारी साढ़े 6 लाख के पार पहुंच गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में, इस अभूतपूर्व अभियान के तहत प्रदेश संगठित तरीके से कई सुविधाएँ उपलब्ध करा रहा है। अभियान का उद्देश है कि हर नागरिक को उनके अधिकार मिलें और वे बिना कोई बाधा के सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम का असर

  • जन समस्याओं का समाधान: अभियान के तहत आयोजित शिविरों में विभिन्न योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। समाज कल्याण पेंशन, आयुष्मान कार्ड, चिकित्सा उपकरण और कृषि उपकरण जैसी सेवाएँ भी निशुल्क प्रदान की जा रही हैं।
  • कई शिविरों का आयोजन: इस अभियान के दूसरे चरण में अब तक 198 शिविरों का आयोजन किया गया है, जिसमें 1 लाख 34 हजार 740 लोगों ने भाग लिया। मानसून सीजन को देखते हुए यह संख्या अत्यधिक है।
  • शिकायतों का निवारण: इस दौरान 23,219 जन शिकायतों में से 20,808 का मौके पर निस्तारण किया गया है, जिससे यह साबित होता है कि प्रशासन की नीतियाँ सफल हो रही हैं।

मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों की परेशानियों के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने की बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को खुद नागरिकों तक पहुँचकर समस्या का निवारण करना चाहिए। इसी कारण से, ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ नामक इस अभियान की शुरुआत की गई थी।

अक्टूबर 2022 में शुरू हुए पहले चरण के दौरान, 681 शिविरों का आयोजन किया गया था, जिसमें 5.33 लाख नागरिकों ने भाग लिया था। उस समय भी 33,000 शिकायतों का समाधान किया गया था। यह कार्यक्रम गवर्नेंस की बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में सराहा गया।

अभियान की उपयोगिता

‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान ने प्रशासन को लोगों के करीब लाया है। प्रशासन स्वयं लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं का शीघ्र निस्तारण कर रहा है। इसके साथ ही, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, "हमारी सरकार लोगों की सेवा में समर्पित है और हम जनसंतुष्टि के संकल्प के साथ निरंतर कार्यरत हैं। इस योजना की सफलता भारत के अन्य राज्यों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण पेश कर सकती है।"

अंत में, यह अभियान केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के हर नागरिक के जीवन में नए अवसर, सुविधा और समस्याओं के समाधान का माध्यम बन रहा है।

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विनीता शर्मा, Team Haqiqat Kya Hai

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