दिल्ली के लाठीचार्ज का गहरा असर उत्तराखंड में, प्रदर्शनकारियों ने उठाई आवाज
The post दिल्ली के लाठीचार्ज का दर्द उत्तराखंड ने महसूस किया appeared first on Avikal Uttarakhand. जंतर-मंतर लाठीचार्ज के विरोध में दून में प्रदर्शन बेरोजगारों ने भी फिर दिखाए तेवर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और एनटीए को समाप्त करने की मांग भर्ती विज्ञापन और परीक्षा कैलेंडर… The post दिल्ली के लाठीचार्ज का दर्द उत्तराखंड ने महसूस किया appeared first on Avikal Uttarakhand.
दिल्ली के लाठीचार्ज का गहरा असर उत्तराखंड में, प्रदर्शनकारियों ने उठाई आवाज
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कम शब्दों में कहें तो, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज ने उत्तराखंड में भी उथल-पुथल मचा दी है। देहरादून में बेरोजगार युवाओं एवं विभिन्न संगठनों ने इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने की माँग उठाई गई।
देहरादून। लंबे समय तक चुप रहने के बाद, उत्तराखंड की युवा और बेरोजगार जनता ने फरवरी में शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर फिर से अपनी आवाज उठाई है। देहरादून की सड़कों पर जबरदस्त नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां की हैं। दिल्ली के मानसिक झटके ने उत्तराखंड के लोगों के लिए सिर्फ एक आंतरिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सशक्त आंदोलन का रूप लिया है।
दिल्ली लाठीचार्ज का गूंज उत्तराखंड में
सोमवार को देहरादून में विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक संगठनों और बेरोजगार युवाओं ने रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा छात्र हितों को लेकर अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर अपनी भड़ास निकाली और सरकार से मांग की कि छात्रों के अधिकारों को सुरक्षित रखा जाए।
बेरोजगारों का दौरा और आगे की रणनीति
एक ओर, जंतर-मंतर पर छात्र-छात्राओं पर हुए पुलिस बल प्रयोग के खिलाफ प्रदर्शन था, वहीं दूसरी ओर, उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं ने दोहरी मांग के तहत सचिवालय की ओर कूच किया।
परेड ग्राउंड और अन्य स्थानों पर सतीश धौलाखंडी के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के कार्यकताओं ने भाग लिया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, एनटीए का समापन और सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई का नारा लगाया।
महिला मंच का समर्थन
कार्यक्रम में महिला मंच की जिला संयोजक निर्मला बिष्ट ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कई अनियमितताएँ बढ़ रही हैं और नीट-यूजी पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की।
अन्य नेताओं ने भी इस कार्रवाई के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और शांति के साथ पदाधिकारियों से जवाबदेही की मांग की। प्रदर्शन में शामिल नेताओं में कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, महिला मंच और एसएफआई शामिल थे।
बेरोजगार संघ की जंग
उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने भी अपनी मांगों को लेकर सचिवालय कूच किया। इस बार बेरोजगारों ने केवल प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि उन्हें यथाशीघ्र भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग उठाई। उनके सामने समस्याओं की लंबी फेहरिस्त है, जिसमें हजारों पदों की रिक्तता और हमारे युवाओं को उचित अवसर प्रदान करने की बात शामिल है।
मुख्य मांगे और आगे की रणनीति
प्रदर्शनकारियों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगों को उठाया:
- दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की न्यायिक जांच।
- पुलिस कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।
- छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा।
- शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस दमन खत्म किया जाए।
- सरकार छात्रों की मांगों पर वार्ता करे।
बुधवार को पुनः प्रदर्शन का आह्वान
प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की है कि 22 जुलाई को गांधी पार्क, देहरादून में फिर से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें छात्रों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और सभी नागरिकों से भाग लेने की अपील की गई है।
इस बार प्रदर्शन में शामिल होंगे:
- उत्तराखंड इंसानियत मंच
- उत्तराखंड महिला मंच
- स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई)
- आम आदमी पार्टी
- उत्तराखंड क्रांति दल
- अन्य विभिन्न छात्र एवं सामाजिक संगठन
दिल्ली से लौटे छात्रों की आवाज
दिल्ली छात्र आंदोलन में शामिल होकर लौटे छात्रों ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन उनका आंदोलन जारी रहेगा। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "छात्रों की आवाज लाठियों से नहीं दबाई जा सकती।">
प्रदर्शन में भाग लेते समय प्रदर्शकों ने ताजा खबरों को सैलाब की तरह प्रकट किया।
- परेड ग्राउंड से घंटाघर तक मार्च।
- केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी।
- जनगीत और रैप के माध्यम से विरोध।
- दिल्ली से लौटे छात्रों का आदर।
- अगले चरण के आंदोलन की घोषणा।
इस घटनाक्रम के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, यह स्पष्ट है कि छात्रों का यह आंदोलन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं का हल मांगने का एक मजबूत तरीका है।
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सादर,
अरुंधति मेहरा,
टीम हकीकत क्या है
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