गढ़वाली फिल्म 'ढोली' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला रजत कमल
The post उपलब्धि- गढ़वाली फिल्म ‘ढोली’ को मिला रजत कमल appeared first on Avikal Uttarakhand. 72 वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार- निर्देशक दिनेश पी. भोंसले की गढ़वाली फिल्म ने रचा इतिहास मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी बधाई अविकल उत्तराखण्ड देहरादून। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फीचर… The post उपलब्धि- गढ़वाली फिल्म ‘ढोली’ को मिला रजत कमल appeared first on Avikal Uttarakhand.
गढ़वाली फिल्म 'ढोली' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला रजत कमल
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कम शब्दों में कहें तो, गढ़वाली फिल्म 'ढोली' ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में रजत कमल और दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि जीती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर पूरी फिल्म टीम को बधाई दी है।
देहरादून। गढ़वाली फिल्म 'ढोली' ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में 'सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म' के रूप में प्रतिष्ठित रजत कमल पुरस्कार प्राप्त कर एक नया इतिहास रच दिया है। इस फिल्म के निर्देशक दिनेश पी. भोंसले की मेहनत और प्रतिभा के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर फिल्म के निर्माता एससी फार्माकेम प्राइवेट लिमिटेड, निर्देशक दिनेश पी. भोंसले और उनकी टीम को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि 'ढोली' को मिला यह सम्मान उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, लोकभाषा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इस सम्मान से न केवल प्रदेश के फिल्म उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि यह गढ़वाली सिनेमा को एक नई पहचान भी देगा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि अन्य कलाकारों और रचनाकारों के लिए प्रेरणादायक है।
उत्तराखंड में सिनेमा का भविष्य
सीएम धामी ने आगे कहा, "हम प्रदेश को फिल्म निर्माण के अनुकूल गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। नई फिल्म नीति के माध्यम से हम प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे युवाओं, स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को नए अवसर प्राप्त होंगे।" यह निश्चित तौर पर उत्तराखंड के सिनेमा उद्योग के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
इस पुरस्कार की जानकारी सुनकर फिल्म की पूरी टीम में खुशी की लहर दौड़ गई है। उनकी मेहनत और संघर्ष का फल अब उन्हें मिल चुका है और यह फिल्म के दर्शकों के लिए भी एक गर्व का विषय है।
यह सच है कि क्षेत्रीय सिनेमा की पहचान अब देश और दुनिया में हो रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय सिनेमा की भूमिका उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं को अच्छी तरह से समझाने में महत्वपूर्ण है जिससे संस्कृति को एक नई पहचान मिल सके।
फिल्म 'ढोली' की विशेषताएँ
फिल्म 'ढोली' में उत्तराखंड की लोक संस्कृति को दर्शाया गया है और यह दर्शकों को एक गहरी शांति और आत्मीयता का अनुभव कराती है। यह फिल्म केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय भाषा, संस्कृति और मान्यताओं के प्रचार-प्रसार के लिए भी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
फिल्म 'ढोली' की इस उपलब्धि ने सिद्ध कर दिया है कि स्थानीय कलाएँ और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है। उम्मीद है कि यह फिल्म अन्य गढ़वाली फिल्मों के लिए भी एक प्रोत्साहन बनेगी।
अंत में, गढ़वाली फिल्म 'ढोली' को मिली सफलता पर हमें गर्व है और यह प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। इस उपलब्धि के लिए सभी को एक बार फिर से बधाई।
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सादर,
टीम हक़ीकत क्या है
– नेहा शर्मा
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