अल्मोड़ा: विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 52वें कृषि विज्ञान मेले का भव्य आयोजन

अल्मोड़ा जिले के हवालबाग स्थित विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 52वें कृषि विज्ञान मेले का आयोजन किया गया।“खेती में नवीनता,पोषण में श्रेष्ठता”थीम पर आयोजित इस मेले में प्रदेशभर से 1500 से अधिक किसानों और उत्पादक संगठनों ने प्रतिभाग किया। इस वर्ष का मेला संस्थान के गौरवशाली इतिहास में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर […] The post Almora:-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान,अल्मोड़ा में 52वें कृषि विज्ञान मेले का आयोजन appeared first on संवाद जान्हवी.

Apr 5, 2026 - 14:12
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अल्मोड़ा: विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 52वें कृषि विज्ञान मेले का भव्य आयोजन
अल्मोड़ा: विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 52वें कृषि विज्ञान मेले का भव्य आयोजन

अल्मोड़ा: विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 52वें कृषि विज्ञान मेले का भव्य आयोजन

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कम शब्दों में कहें तो, अल्मोड़ा जिले के हवालबाग स्थित विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 52वें कृषि विज्ञान मेले का आयोजन किया गया। 'खेती में नवीनता, पोषण में श्रेष्ठता' थीम पर आयोजित इस मेले में प्रदेशभर से 1500 से अधिक किसानों और उत्पादक संगठनों ने प्रतिभाग किया। यह मेला कृषि की नवीन तकनीकों को किसानों तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना।

इस वर्ष के कृषि विज्ञान मेले ने संस्थान के इतिहास में एक नए मील के पत्थर के रूप में स्थान बनाया। इस आयोजन में पर्वतीय कृषि की उन्नत तकनीकों और शोध परिणामों को प्रदर्शित किया गया, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिलने की संभावना बढ़ी।

मेले में विभिन्न गतिविधियाँ

  • प्रदर्शनी में भाग लेते हुए 1500 से अधिक किसानों और उत्पादक संगठनों ने अपनी उपज और नए तरीकों का प्रदर्शन किया।
  • किसानों ने विकास प्रदर्शनी का आयोजन किया, जिसमें उन्हें वैज्ञानिकों द्वारा विकसित आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत उपकरणों की जानकारी भी दी गई।

आधिकारिक उद्घाटन और मेले की शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' से हुआ, जो मेले के गरिमामय माहौल को और भी बढ़ा गया। उद्घाटन समारोह का आयोजन मुख्य अतिथि डॉ. मांगी लाल जाट, सचिव कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, भारत सरकार और महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा किया गया।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ. देवेन्द्र कुमार यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) और डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) भी उपस्थित रहे।

कृषकों के क्षेत्रों का भ्रमण

मेले की गतिविधियों का औपचारिक आरंभ कृषकों के प्रक्षेत्र भ्रमण के साथ हुआ, जिसमें किसानों ने संस्थान द्वारा विकसित की जा रही उन्नत फसलों और नवीन कृषि तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस दौरान, पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए एक वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

संस्थान की उपलब्धियाँ

संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने अपने स्वागत भाषण में किसानों और अतिथियों को संस्थान की उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संस्थान अब तक 200 से अधिक उन्नत प्रजातियां विकसित कर चुका है, जिसमें बायोफोर्टिफाइड मक्का की किस्में 'वी.एल. त्रिपोषी' और 'वी.एल. सुपोषिता' के सफल प्रयोग का विशेष उल्लेख किया।

डॉ. कान्त ने बताया कि नए प्रयोगों में हींग और किनोआ जैसी नई फसलों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो भविष्य की आय का साधन बन सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मशरूम उत्पादन और मौनपालन जैसे क्षेत्रों में प्रयोगों के सफल परिणाण किसानों की आय में वृद्धि कर रहे हैं।

विशिष्ट अतिथियों के विचार

मुख्य अतिथि डॉ. मांगी लाल जाट ने अपने संबोधन में कृषि में नवीन तकनीकों की आवश्यकता को बताया और उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर बल दिया। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।

डॉ. राजबीर सिंह ने पर्वतीय कृषि के विकास में तकनीकी हस्तांतरण की महत्वपूर्ण भूमिका पर बात करते हुए कहा कि कीवी, लैमन ग्रास, जैसे फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया।

प्रगतिशील किसानों का सम्मान

मेले में प्रगतिशील किसानों का सम्मान किया गया, जहाँ उनके काम और नवीन तकनीकों को अपनाने की सराहना की गई। इस अवसर पर विभिन्न किसानों को पुरस्कार दिए गए, उदाहरण के लिए मंजू देवी, सरदार सिंह, चन्दन सिंह, और अन्य।

इस अवसर पर उत्कृष्ट कृषि साधनों का वितरण भी किया गया, जैसे एग्रीकैनन, वी.एल. कुरमुला ट्रैप, आदि, जिससे किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने में सहायता मिलेगी।

अंत में

कृषि विज्ञान मेले में आयोजित प्रदर्शनी और गोष्ठियों ने न केवल किसानों को नवीनतम जानकारी प्रदान की, बल्कि उनके विभिन्न मुद्दों के त्वरित समाधान भी प्रस्तुत किए। प्रगतिशील किसानों के अनुभवों ने यह सिद्ध किया कि तकनीक और मेहनत के सही संयोग से ही खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।

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सादर,
टीम हकीकत क्या है,
अनु वर्मा

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