UKSSSC वाहन चालक परीक्षा में अनोखे नामों पर सवाल उठे, आयोग की सफाई
DEHRADUN: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में जारी की गई वाहन चालक पद की प्रोविजनल मेरिट लिस्ट में अटपटे नामों से आयोग पर सवाल उठने लगे हैं। सूची सार्वजनिक होने के बाद से ही अभ्यर्थियों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इसकी तस्वीरें वायरल हो रही […] The post UKSSSC वाहन चालक परीक्षा में चयनित हो गए Explore Gyan, UKUL, आयोग पर उठे सवाल appeared first on Devbhoomi Dialogue.
UKSSSC वाहन चालक परीक्षा में अनोखे नामों पर सवाल उठे, आयोग की सफाई
DEHRADUN: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) एक बार फिर विवादों में है। हाल ही में जारी की गई वाहन चालक पद की प्रोविजनल मेरिट लिस्ट में कुछ अटपटे नाम शामिल होने के कारण आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस सूची का प्रकाशन होते ही, सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं, जिससे अभ्यर्थियों में चिंता और रोष बढ़ गया। आयोग ने आरोप लगाया है कि ये नाम अभ्यर्थियों द्वारा स्वयं दिए गए हैं।
दरअसल, UKSSSC ने विज्ञापन संख्या 75/उ0अ0से0च0आ0/2026 के अंतर्गत विभिन्न विभागों में 75 वाहन चालक एवं प्रवर्तन चालक पदों के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन 31 मई 2026 को किया था। इस परीक्षा के परिणाम के आधार पर तकनीकी वाहन चालन परीक्षा के लिए प्रोविजनल मेरिट लिस्ट 19 जून 2026 को आयोग की वेबसाइट पर प्रकाशित की गई थी।
मेरिट सूची के प्रकाशन के बाद दो नाम विशेष रूप से चर्चा का विषय बन गए हैं - ‘Explore Gyan’ और ‘UKUL’। इन नामों के आगे पिता का नाम 'हरीश चंद्र' और 'गोपाल सिंह भैसोड़ा' दर्ज है। जनता का कहना है कि सरकारी भर्ती परीक्षा की आधिकारिक मेरिट लिस्ट में इस तरह के नाम आना अविश्वसनीय है। कई अभ्यर्थियों ने यह सवाल उठाया है कि क्या यह किसी डेटा एंट्री की लापरवाही का परिणाम है, जबकि कुछ लोग इसे आयोग की कार्य प्रणाली और सूची तैयार करने में पारदर्शिता की कमी के रूप में देख रहे हैं।
आयोग की सफाई
जब मामला तूल पकड़ने लगा, तो आयोग ने अपनी सफाई दी। आयोग के अनुसार, अभ्यर्थियों ने आवेदन पत्र में ‘Explore Gyan’ और ‘UKUL’ नाम स्वयं भरे थे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदन पत्र में दी गई जानकारी के लिए अभ्यर्थी पूरी तरह से जिम्मेदार होते हैं। यदि दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो ऐसे अभ्यर्थियों का चयन निरस्त किया जा सकता है और उन्हें भविष्य की परीक्षाओं के लिए डि-बार भी किया जा सकता है।
यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि परीक्षा प्रणाली की प्रक्रिया में अधिकतम पारदर्शिता की आवश्यकता है। अभ्यर्थियों का यह सवाल जायज़ है कि सरकारी संस्थानों द्वारा ऐसी लापरवाही के लिए क्या कार्रवाई की जाती है? ऐसे घटनाएं भविष्य में अधिक गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
कम शब्दों में कहें तो, UKSSSC की मेरिट सूची में अटपटे नामों के आने की वजह से आयोग पर उठते सवाल और भी गहरे हो गए हैं। आयोग ने भले ही अपनी सफाई दी हो, लेकिन इसने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी को उजागर किया है।
चलिए, विषय पर ध्यान देते हुए हम उम्मीद करते हैं कि आयोग भविष्य में इस तरह की गलतियों को सुधारने के लिए ठोस उपाय करेगा, ताकि अभ्यर्थियों का विश्वास इस प्रक्रिया में बना रहे। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में पारदर्शिता और उचित प्रबंधन का होना कितना आवश्यक है।
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Team Haqiqat Kya Hai - सृष्टि चौधरी
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