पूर्व राज्यपाल जनरल एम एम लखेड़ा का निधन: एक शिक्षाप्रद जीवन की कहानी
The post पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल एम एम लखेड़ा का निधन appeared first on Avikal Uttarakhand. अविकल उत्तराखण्ड देहरादून। पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल मदन मोहन लखेड़ा का 89 वर्ष की उम्र में देहरादून में निधन हो गया। मंगलवार को हरिद्वार में अंतिम संस्कार किया जाएगा।… The post पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल एम एम लखेड़ा का निधन appeared first on Avikal Uttarakhand.
पूर्व राज्यपाल जनरल एम एम लखेड़ा का निधन: एक शिक्षाप्रद जीवन की कहानी
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कम शब्दों में कहें तो, पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल मदन मोहन लखेड़ा का 89 वर्ष की उम्र में देहरादून में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को हरिद्वार में किया जाएगा।
देहरादून से ख़बर है कि पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मदन मोहन लखेड़ा का निधन हो गया है। उनका जीवन भारतीय सेना और प्रशासन में उनकी अटूट सेवाओं का प्रतीक रहा है। इस दुखद अवसर पर, उनके अनुयायी और समाज के हर क्षेत्र से जुड़े लोग शोक व्यक्त कर रहे हैं।
सेना में अद्वितीय सेवाएं
लखेड़ा ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर सेवाएं दीं और वह उत्तरी सेना कमांड के प्रमुख भी रहे। उनके कार्यकाल में उन्होंने 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान अपनी बहादुरी का परिचय दिया और सेना का नेतृत्व किया। उन्हें उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा गया था।
राजनीतिक करियर और राज्यपाल का कार्यकाल
सेवानिवृत्ति के बाद, उनके अनुभवों और ज्ञान का लाभ भारत सरकार ने लिया। उन्होंने पांडिचेरी और अंडमान निकोबार द्वीप के उपराज्यपाल और मिजोरम के राज्यपाल के रूप में महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। उनके द्वारा किए गए कार्यों को आज भी याद किया जाता है।
बीते समय के प्रमुख आंशिक तथ्य
जनरल लखेड़ा का जन्म 1937 में टिहरी गढ़वाल जिले के जखण्ड़ गांव में हुआ था। उनके पिता जयानंद लखेड़ा थे। उन्हें भारतीय सेना में 1958 में कमीशन प्राप्त हुआ और उन्होंने अपने करियर में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
उनका परिवार, विशेषकर टिहरी गढ़वाल के लोग, उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कांग्रेस नेता भूदेव लखेड़ा के छोटे भाई के रूप में जानते हैं। उनके योगदान का उल्लेख करते हुए यह भी कहा जा सकता है कि वे पर्वतीय क्षेत्र में सेना की भर्ती जैसे कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं।
व्यक्तिगत जीवन और कार्यशैली
जनरल लखेड़ा की कार्यशैली बहुत लो प्रोफाइल थी। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को चुपचाप निभाया और चर्चा में रहना पसंद नहीं किया। इस प्रकार की विनम्रता और समर्पण से उन्होंने समाज को प्रेरित किया। उनी पर वरिष्ठ पत्रकार महिपाल नेगी ने सही कहा है कि उनके काम की पहचान उनकी शांति में निहित थी।
शोक और श्रद्धांजलि
जनरल लखेड़ा के निधन पर शोक व्यक्त करना एक तरकीब नहीं है, बल्कि उनके कार्यों और उनके जीवन में उनके योगदान को याद करने का एक अवसर है। उनके अनुयायियों और प्रशंसकों के बीच उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।
उनके निधन के बाद, हम सभी को उनके जीवन से सीखने की आवश्यकता है। एक ऐसी जीवन यात्रा जो न केवल सेना में, बल्कि सामान्य जीवन में भी प्रेरणा का एक स्रोत हो सकती है।
इस दुखद खबर को ध्यान में रखते हुए, उनकी आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार को इस कठिन समय में मजबूती प्रदान करे।
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सादर,
टीम हकीकत क्या है
सुषमा अदित्य
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