नंदा की चौकी पुल मामले में राज्य सरकार को मिली बड़ी राहत: हाईकोर्ट का फैसला
The post चर्चित नंदा की चौकी पुल मामले में राज्य सरकार को राहत appeared first on Avikal Uttarakhand. हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग ठुकराई,जनहित याचिका खारिज राज्य सरकार आवश्यक कार्रवाई कर चुकी और जांच जारी है-हाईकोर्ट पुल ढहने के मामले में तीन इंजीनियर और ठेकेदार पहले ही… The post चर्चित नंदा की चौकी पुल मामले में राज्य सरकार को राहत appeared first on Avikal Uttarakhand.
नंदा की चौकी पुल मामले में राज्य सरकार को मिली बड़ी राहत: हाईकोर्ट का फैसला
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नंदा की चौकी पुल के ढहने के मामले में दायर जनहित याचिकाओं को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को राहत दी है। अदालत ने सीबीआई जांच की मांग को भी ठुकरा दिया है, यह दर्शाते हुए कि राज्य सरकार ने पहले से ही आवश्यक कार्रवाई की है और जांच जारी है।
नैनीताल/देहरादून। सोलह करोड़ की लागत से बने नंदा की चौकी पुल को लेकर हाईकोर्ट के हालिया निर्णय ने उत्तराखंड की राज्य सरकार को राहत की सांस दी है। इस मामले पर न्यायालय ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए सीबीआई जांच की मांग को भी अस्वीकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।
पुल ढहने के मामले में जांच जारी
पुल के एक हिस्से के सार्वजनिक उपयोग के लिए खोले जाने के तुरंत बाद ढहने की घटना के संदर्भ में, हाईकोर्ट ने स्वतंत्र उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की मांग को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार मामले में पहले ही जांच शुरू कर चुकी है और पर्याप्त कार्रवाई भी की जा चुकी है, इसलिए किसी अतिरिक्त जांच की आवश्यकता नहीं है।
याचिका में क्या कहा गया था?
डॉ. बैजनाथ द्वारा दायर जनहित याचिका में नंदा की चौकी पुल के निर्माण, निगरानी और गुणता नियंत्रण से संबंधित सभी दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत करने की मांग की गई थी। याचिका में पुल में आई दरारों के कारणों की उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति द्वारा सीधी जांच की अपील की गई थी।
अनुबंधों पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि पुल का निर्माण करने वाली कंपनी का चयन अनुचित तरीके से किया गया। इसमें यह आरोप भी शामिल था कि कंपनी की एक साझेदार, जो भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष हैं, उनके राजनीतिक प्रभाव के कारण ठेका दिया गया। हालांकि, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि लोक निर्माण विभाग पहले से ही जांच कर रहा है।
राज्य सरकार ने उठाए ठोस कदम
राज्य सरकार ने अदालत को यह भी सूचित किया कि इस मामले में तीन इंजीनियरों और ठेकेदार को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि अनुबंध में बुनियादी दोष दायित्व अवधि तीन वर्ष है। इसके तहत पुल में आए दोष इस प्रावधान में आते हैं।
आगे की प्रक्रिया
इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने निर्णय लिया कि राज्य सरकार ने जांच शुरू कर दी है और अब किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद, खंडपीठ ने जनहित याचिका की कार्यवाही समाप्त कर दी।
क्या था मामला?
गौरतलब है कि 2025 की बारिश में नंदा की चौकी पुल टूट गया था, जिसे लोक निर्माण विभाग ने 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया था। यह पुल 12 जुलाई 2026 को यातायात के लिए खोला गया था। हालाँकि, 28 जुलाई को हुए भारी बारिश के कारण पुल की एप्रोच रोड में क्षति आई, जिसे बाद में ठीक किया गया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखे हमले किए और यह सवाल उठाया कि क्या राज्य स्तर पर अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ प्रभावी जांच की जाएगी।
निष्कर्ष
उपरोक्त घटनाक्रम और फैसले ने राज्य सरकार को अपने पक्ष में मजबूती दी है, लेकिन आगे की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर सभी की निगाहें रहेगी।
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सीमा ठाकुर
Team Haqiqat Kya Hai
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