चुनावी बिसात – ‘एक परिवार-एक टिकट’ पर कांग्रेस की अंदरूनी हलचल
The post चुनावी बिसात – ‘एक परिवार-एक टिकट’ पर कांग्रेस में बढ़ी हलचल appeared first on Avikal Uttarakhand. विरोध प्रदर्शनों और दावेदारों ने बढ़ाई सियासी गर्मी अविकल थपलियाल देहरादून। उत्तराखंड का माहौल गर्म है। विधानसभा चुनाव अब बहुत दूर नहीं रह गए। विधायक व मंत्री वार्डों में घुस… The post चुनावी बिसात – ‘एक परिवार-एक टिकट’ पर कांग्रेस में बढ़ी हलचल appeared first on Avikal Uttarakhand.
चुनावी बिसात – ‘एक परिवार-एक टिकट’ पर कांग्रेस की अंदरूनी हलचल
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस पार्टी में 'एक परिवार-एक टिकट' के मुद्दे को लेकर हलचल तेज हो गई है। विरोध प्रदर्शनों और दावेदारों के बढ़ते दबाव ने पार्टी की स्थिति को और भी गर्म कर दिया है।
सियासी गर्मी में बढ़ोतरी
देहरादून में उत्तराखंड का माहौल चुनावी बेला के करीब आते ही गर्म होता जा रहा है। विधायक और मंत्री वार्डों में अपनी गतिविधियों को तेज कर रहे हैं। कांग्रेस की प्रभारी शैलजा कुमारी भी अब उत्तराखंड में पहले के मुकाबले ज्यादा सक्रिय नजर आ रही हैं। इस बीच, नए राजनीतिक दलों के गठन की भी बातें सामने आ रही हैं। विभिन्न दावेदार सोशल मीडिया पर भी अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं। इस स्थिति में हर कोई जनता के सामने अपने मुद्दों को लेकर खड़ा हो रहा है।
पार्टी में 'एक परिवार-एक टिकट' के कड़े नियमों पर भी मंथन चल रहा है। नैनीताल सीट से पूर्व कांग्रेसी विधायक यशपाल आर्य के पुत्र संजीव आर्य ने हाल ही में टिकट की दावेदारी छोड़ते हुए इस मुहिम को आगे बढ़ाया है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रीतम सिंह जैसे बड़े नेताओं की दुविधा बढ़ गई है, और कांग्रेस हाईकमान के लिए भी यह एक बड़ा चैलेंज बन गया है।
हरीश रावत की दुविधा
उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत इस बार के चुनावी महासंग्राम में लीड रोल से वंचित रहे हैं। इस स्थिति में यशपाल आर्य के पुत्र की कदम का उठाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। वह अपने परिवार के अन्य सदस्यों—बेटी अनुपमा रावत, पुत्र आनंद रावत और बीरेंद्र रावत के लिए टिकट मांगने में जुटे हुए हैं। हालाँकि, प्रदेश प्रभारी ने पहले ही 'एक परिवार-एक टिकट' के संकेत दे चुके हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
विरोध प्रदर्शनों की तेजी
इसी बीच, चुनावी हलचल तेजी से बढ़ती जा रही है। विभिन्न पार्टी के नेताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। बीते दिनों राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट, विधायक सरिता आर्य, और स्पीकर ऋतु खंडूड़ी जैसे भाजपा नेताओं के खिलाफ खुलेआम विरोध की खबरें भी सामने आ रही हैं। यह स्पष्ट हो रहा है कि भाजपा के लिए यह नया संकट बन सकता है।
भविष्य की चुनौतियाँ
2022 के चुनावी अनुभव से सीख लेते हुए, हरक सिंह रावत अपनी पत्नी अनुकृति गुसाईं के लिए टिकट मांगने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने भाजपा का रुख दिखाई, जिससे उनकी कांग्रेस से दूरियां बढ़ रही हैं। वहीं, अन्य नेताओं जैसे रणजीत रावत भी अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रयासरत हैं। इस साल की संघर्षपूर्ण चुनावी स्थितियों को देखते हुए, सभी प्रमुख राजनीतिक दलों में सुधार और चुनौतियाँ सामने आ रही हैं।
चुनावी सर्वेक्षणों में भाजपा की स्थिति गंभीर मानी जा रही है, और कई नॉन परफार्मर विधायकों के खिलाफ आंदोलनें चल रहे हैं। इससे यह साफ हो रहा है कि आगामी चुनाव में कई सीटों पर उलटफेर हो सकता है।
अंत में, यहां से यह स्पष्ट है कि 2027 का चुनावी महासंग्राम देखने के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के भीतर काफी परिवर्तन की संभावना है।
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सादर, टीम हकीकत क्या है
नंदिनी कुमारी
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