चीन सीमा पर बीएसएनएल के टॉवरों में सिग्नल नहीं, अधिकारियों पर उठ रहे हैं सवाल

The post चीन बार्डर पर खड़े बीएसएनएल के दोनों टॉवरों में हरकत नहीं appeared first on Avikal Uttarakhand. विभाग ने कहा, लीलम व बोगड्यार टावर हो गए क्रियाशील धरातल पर दोनों टावरों में नहीं है सिग्नल दो साल से शो पीस बने है टावर चीन सीमा पर झूठ… The post चीन बार्डर पर खड़े बीएसएनएल के दोनों टॉवरों में हरकत नहीं appeared first on Avikal Uttarakhand.

Jun 13, 2026 - 18:39
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चीन सीमा पर बीएसएनएल के टॉवरों में सिग्नल नहीं, अधिकारियों पर उठ रहे हैं सवाल
चीन सीमा पर बीएसएनएल के टॉवरों में सिग्नल नहीं, अधिकारियों पर उठ रहे हैं सवाल

चीन सीमा पर बीएसएनएल के टॉवरों में सिग्नल नहीं, अधिकारियों पर उठ रहे हैं सवाल

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कम शब्दों में कहें तो, चीन बार्डर पर खड़े बीएसएनएल के लीलम और बोगड्यार टॉवर पिछले दो वर्षों से सिग्नल विहीन हैं, जबकि विभाग ने इन्हें सक्रिय बताया है।

भारतीय संचार निगम (BSNL) के द्वारा हाल ही में जारी एक पत्र में आरोप लगाया गया है कि लीलम और बोगड्यार टॉवरों को "क्रियाशील" जानकर प्रस्तुत किया गया है जबकि हकीकत यह है कि ये टॉवर किसी शोपीस की तरह खड़े हुए हैं। इनकी स्थिति भारतीय प्रशासन और नागरिकों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है, खासकर जब यह टॉवर चीन के सीमा क्षेत्र में स्थित हैं।

बीएसएनएल का दावा और हकीकत

हाल ही में मुन्स्यारी क्षेत्र में मुनस्यारी बचाओ संघर्ष समिति ने भारत सरकार के संचार मंत्री को पत्र लिखकर उन अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने झूठे दावे किए हैं। विभाग का कहना है कि इन टॉवरों को सक्रिय कर दिया गया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इनसे कोई सिग्नल नहीं आ रहा है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

बूंगा निवासी मनोहर सिंह रावत के पत्र के उत्तर में BSNL के सहायक महाप्रबंधक (प्रचालन) ने बताया कि जोहार क्षेत्र में कुल 14 बीएसएनएल टॉवर प्रस्तावित हैं। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इससे स्थानीय लोगों की संचार सुविधा पर सवाल उठते हैं और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

सिग्नल की कमी से परेशान नागरिक

मल्ला जोहार की क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मी रलमाल ने बताया कि टॉवरों का कार्य दो वर्ष पूर्व पूरा हो चुका था, लेकिन बीएसएनएल के अधिकारियों ने किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की। इससे स्थानीय जनता में बीएसएनएल के प्रति विश्वास कम हो गया है।

सरकार से उम्मीदें और जन आंदोलन की चेतावनी

समिति के संयोजक जगत सिंह मर्तोलिया ने कहा कि इस पत्र के प्रकाश में आने के बाद बीएसएनएल की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ गई है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर इन टॉवरों से सिग्नल शुरू नहीं हुआ, तो एक बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।

उनका आरोप है कि इस तरह की स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। आने वाले समय में इस मामले पर गृह मंत्रालय को भी अवगत कराने की योजना है।

अंत में, यह स्थिति न केवल बीएसएनएल के लिए बल्कि देश की संचार प्रणाली और सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। जनहित में इस मुद्दे को दिखाना और इसकी सही जानकारी सभी को देना आवश्यक है।

अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें.

निवेदक: सीमा शर्मा, टीम हकीकत क्या है

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