उत्तराखंड: तपोवन जियोथर्मल परियोजना के अन्वेषण की शुरुआत, स्वच्छ ऊर्जा के लिए एक नया युग
उत्तराखण्ड ने भू-तापीय (जियोथर्मल) ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए चमोली जनपद के तपोवन में जियोथर्मल परियोजना के वैज्ञानिक अन्वेषण कार्य की शुरुआत कर दी है। परियोजना के लिए विश्व की अग्रणी आइसलैंड की जियोथर्मल विशेषज्ञ संस्था (Verkis Consulting Engineers) की भारतीय सहयोगी फर्म को यूजेवीएन लिमिटेड ने परामर्शदाता नियुक्त किया है। […] The post Uttarakhand:-तपोवन जियोथर्मल परियोजना का अन्वेषण कार्य शुरू,उत्तराखण्ड ने स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बढ़ाया बड़ा कदम appeared first on संवाद जान्हवी.
उत्तराखंड: तपोवन जियोथर्मल परियोजना के अन्वेषण की शुरुआत, स्वच्छ ऊर्जा के लिए एक नया युग
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड ने भू-तापीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चमोली जनपद के तपोवन में जियोथर्मल परियोजना के वैज्ञानिक अन्वेषण कार्य की शुरुआत की है। इस परियोजना के लिए आइसलैंड की प्रमुख जियोथर्मल विशेषज्ञ संस्था (Verkis Consulting Engineers) की भारत में सहयोगी फर्म को यूजेवीएन लिमिटेड द्वारा परामर्शदाता नियुक्त किया गया है।
भू-तापीय ऊर्जा: एक परिभाषा और अवसर
भू-तापीय (जियोथर्मल) ऊर्जा एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है जो पृथ्वी के अंदर मौजूद गर्मी से उत्पन्न होती है। यह ऊर्जा न केवल स्थायी है, बल्कि इसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है जैसे कि बिजली उत्पादन, हीटिंग और औद्योगिक प्रक्रियाएं। उत्तराखंड में इस ऊर्जा का अन्वेषण एक ऐसे समय पर हो रहा है जब दुनिया स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ रही है।
अन्वेषण कार्य का महत्व और ब्योरा
यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने जानकारी दी कि तपोवन क्षेत्र को एक मेगावाट की पायलट परियोजना और 10 मेगावाट की व्यावसायिक जियोथर्मल विद्युत परियोजना के लिए उपयुक्त पाया गया है। यह प्रारंभिक कदम न केवल राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि इससे स्थानीय समुदायों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
राज्य सरकार की प्राथमिकता और दृष्टिकोण
प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा, आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि परामर्शदाता द्वारा प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके अंतर्गत ड्रिलिंग, भू-वैज्ञानिक परीक्षण और अन्य तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 2025 में भू-तापीय ऊर्जा नीति लागू की थी, और तपोवन परियोजना को जून 2026 में अन्वेषण के लिए सौंपा गया था।
मुख्यमंत्री का अभिवादन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस महत्वाकांक्षी पहल के लिए यूजेवीएन लिमिटेड और ऊर्जा विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत है और इससे न केवल ऊर्जा के नए स्रोत विकसित होंगे बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
एक नई पहचान के लिए संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने भविष्यवाणी की कि जियोथर्मल परियोजना उत्तराखंड को भू-तापीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभانے वाली है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाई जा रही यह परियोजना आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी लाभदायक सिद्ध होगी।
इस प्रकार, उत्तराखंड ने जियोथर्मल ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी संभावनाओं को पहचानते हुए एक नई दिशा प्रदान की है। यह न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक सकारात्मक संकेत है कि स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग हमारे पर्यावरण को संरक्षित करने के साथ-साथ ऊर्जा के नए स्रोतों के विकास में भी सहायक हो सकता है।
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सादर,
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दिव्या शर्मा
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