उत्तराखंड में मदरसों में बिहार से लाए गए बच्चों की जांच: मुख्यमंत्री ने सख्त कदम उठाने का दिया आश्वासन

The post दून के मदरसों में बिहार से लाए गए बच्चों के मामले ने तूल पकड़ा appeared first on Avikal Uttarakhand. मदरसों में पढ़ाने के लिए बिहार से लाये गए बच्चे पूरे प्रदेश में वेरिफिकेशन अभियान, नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई तय अविकल उत्तराखण्ड देहरादून। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक… The post दून के मदरसों में बिहार से लाए गए बच्चों के मामले ने तूल पकड़ा appeared first on Avikal Uttarakhand.

Apr 17, 2026 - 00:39
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उत्तराखंड में मदरसों में बिहार से लाए गए बच्चों की जांच: मुख्यमंत्री ने सख्त कदम उठाने का दिया आश्वासन
उत्तराखंड में मदरसों में बिहार से लाए गए बच्चों की जांच: मुख्यमंत्री ने सख्त कदम उठाने का दिया आश्वासन

दून के मदरसों में बिहार से लाए गए बच्चों के मामले ने तूल पकड़ा

कम शब्दों में कहें तो, मदरसों में पढ़ाने के लिए बिहार से लाए गए बच्चों के मामले ने उत्तराखंड में गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं। इस मामले की जांच शुरू हो चुकी है और राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस विषम परिस्थिति में बच्चों की सुरक्षा और पारदर्शिता को तवज्जो दी जा रही है। विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.

बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

देहरादून। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें बताया गया है कि उत्तराखंड के मदरसों में बिहार के बच्चों को लाने की बात सामने आई है। इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने जांच के आदेश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, पारदर्शिता और नियमों का पालन उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा, "किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।" यह बयान प्रदेश की संजीदगी और बच्चों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को रेखांकित करता है।

व्यापक सत्यापन अभियान

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने राज्य के विभिन्न जिलों जैसे देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल के जिलाधिकारियों को व्यापक सत्यापन अभियान संचालित करने के निर्देश दिए हैं। उनके अनुसार, इस अभियान के अंतर्गत बच्चों के आने के स्रोत, अभिभावकों की सहमति, और उन्हें लाने वाले व्यक्तियों की भूमिका की गहन पड़ताल की जाएगी।

मदरसों का निरीक्षण

जांच के तहत प्रदेश के सभी मदरसों में सघन निरीक्षण और सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। वर्तमान में उत्तराखंड में 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं। इस प्रकार के मामलों में सख्ती बरते जाने की आवश्यकता है ताकि बच्चों का सही तरीके से पालन-पोषण और शिक्षा हो सके।

भविष्य की दिशा

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 के अंतर्गत लागू होने वाले उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के अनुसार, 1 जुलाई 2026 के बाद मदरसा बोर्ड समाप्त कर दिया जाएगा। उसके पश्चात सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेना और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम ना केवल बच्चों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाते हैं, बल्कि समाज में शिक्षा के महत्व को भी उजागर करते हैं। इस दिशा में प्रभावी कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

देखें सोशल मीडिया में प्रसारित वीडियो

यहाँ देखें वीडियो

इन सब परिस्थितियों में हमें यह सुनिश्चत करना चाहिए कि बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों की सुरक्षा सर्वोपरि हो। ऐसे मामलों में प्रभावी कदम उठाने से ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

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लेखक: रीमा शर्मा, टीम Haqiqat Kya Hai

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