उत्तराखंड की भाजपा सरकार का मदरसा बोर्ड भंग करना: ध्रुवीकरण की राजनीति का एक नया अध्याय
The post भाजपा प्रदेश में कर रही केवल ध्रुवीकरण की राजनीति appeared first on Avikal Uttarakhand. मदरसा बोर्ड भंग करने का निर्णय जनता को भटकाने का प्रपंच अविकल उत्तराखंड देहरादून। उत्तराखंड की भाजपा सरकार के मदरसा बोर्ड भंग करने के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिल… The post भाजपा प्रदेश में कर रही केवल ध्रुवीकरण की राजनीति appeared first on Avikal Uttarakhand.
उत्तराखंड की भाजपा सरकार का मदरसा बोर्ड भंग करना: ध्रुवीकरण की राजनीति का एक नया अध्याय
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में भाजपा सरकार का मदरसा बोर्ड भंग करने का निर्णय, जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की एक कोशिश है। इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि सरकार ध्रुवीकरण की राजनीति में संलिप्त है।
देहरादून से आई खबरों के अनुसार, उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने हाल ही में मदरसा बोर्ड को भंग करने का निर्णय लिया है। इस मुद्दे पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कदम केवल जनता के ध्यान को भटकाने के लिए उठाया गया है।
ध्रुवीकरण की राजनीति का वास्तविक चेहरा
धस्माना ने कहा कि जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, तब से जनता के सामने महंगाई, रसोई गैस की किल्लत, महिलाओं पर बढ़ते अपराध और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दे सामने आए हैं। इन सभी समस्याओं से निपटने में असफल होने के कारण, भाजपा ने अब धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति को अपनाया है।
मदरसा बोर्ड: शिक्षा का एक माध्यम
धस्माना ने यह भी बताया कि वर्ष 2005 में नारायण दत्त तिवारी की सरकार ने उत्तराखंड मुस्लिम एजुकेशन मिशन का गठन किया था। इसके अंतर्गत मदरसा बोर्ड भी स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ सामान्य शिक्षा भी प्रदान करना था।
भाजपा का निर्णय: धार्मिकता का दिखावा
बीजेपी के इस निर्णय को लेकर धस्माना ने कहा कि यह केवल मुस्लिम विरोधी मानसिकता का परिणाम है। उन्होंने यह भी बताया कि मदरसा बोर्ड के तहत यह सुनिश्चित किया गया था कि छात्रों को एनसीआरटी का पाठ्यक्रम भी पढ़ाया जाए, जो संघ परिवार और भाजपा के लोगों को पसंद नहीं आया।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया
प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा की इस कार्रवाई की घोर निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह 'ध्रुवीकरण' की राजनीति एक सुनियोजित प्रपंच है, जो जनता के असली मुद्दों से ध्यान हटा कर केवल धार्मिक आधार पर वोट बैंक की सृजन की ओर बढ़ रहा है।
इसके तहत, प्रदेश कांग्रेस ने इस निर्णय के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया है और जनता को इसके वास्तविक कारणों और इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराने की दिशा में काम करने की बात कही है।
निष्कर्ष
आखिरकार, भाजपा सरकार का यह कदम एक गंभीर राजनीतिक संकट की ओर इशारा करता है, जो सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि केंद्र में धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ाने की मंशा से जुड़ा हुआ है। देखने वाली बात यह होगी कि क्या प्रदेश की जनता इस बार फिर से ऐसे प्रपंचों में आएगी या वे अपने वास्तविक मुद्दों की ओर ध्यान केंद्रित करेगी।
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