चंपावत दुष्कर्म प्रकरण: साजिश के साक्ष्य सामने आए

The post चंपावत दुष्कर्म प्रकरण में साजिश के संकेत appeared first on Avikal Uttarakhand. वैज्ञानिक और तकनीकी जांच में कई दावे संदिग्ध झूठे आरोप साबित होने पर कार्रवाई की चेतावनी अविकल उत्तराखंड देहरादून/चंपावत। चंपावत के चर्चित नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस जांच के दौरान… The post चंपावत दुष्कर्म प्रकरण में साजिश के संकेत appeared first on Avikal Uttarakhand.

May 8, 2026 - 00:39
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चंपावत दुष्कर्म प्रकरण: साजिश के साक्ष्य सामने आए
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चंपावत दुष्कर्म प्रकरण: साजिश के साक्ष्य सामने आए

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कम शब्दों में कहें तो, चंपावत दुष्कर्म मामले में अब नई जानकारी सामने आई है, जिससे मामला साजिश का प्रतीक बनता दिख रहा है।

देहरादून/चंपावत। चंपावत में 16 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के चर्चित प्रकरण के संदर्भ में पुलिस जांच ने एक नया मोड़ ले लिया है। उत्तराखंड पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कई तथ्य संदिग्ध पाए हैं, जिससे यह साफ हो रहा है कि इस मामले में सुनियोजित साजिश हो सकती है। पुलिस का कहना है कि यदि झूठे आरोप साबित होते हैं, तो कार्रवाई की जाएगी।

घटनाक्रम और पुलिस की कार्रवाई

पीड़िता की ओर से 6 मई 2026 को थाने में दी गई तहरीर में बताया गया था कि 5 मई की रात उसके साथ तीन व्यक्तियों ने दुष्कर्म किया। इस तहरीर के आधार पर पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने क्षेत्राधिकारी चंपावत की निगरानी में 10 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।

पुलिस अधीक्षक ने घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए पीड़िता के साथ बातचीत की और फोरेंसिक टीम को बुलाकर वैज्ञानिक जांच कराई। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण, काउंसलिंग और न्यायालय में बयान भी दर्ज कराए गए। सुरक्षा और देखरेख के लिए मजिस्ट्रेट की नियुक्ति भी की गई थी।

शुरुआती जांच के निष्कर्ष

पुलिस की विवेचना के दौरान यह पाया गया कि पीड़िता गांव सल्ली में एक विवाह समारोह में अपने दोस्त के साथ गई थी। इसकी पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के माध्यम से हुई है।

पुलिस का कहना है कि चिकित्सीय परीक्षण में किसी प्रकार की बाहरी या अंदरूनी चोट, संघर्ष अथवा जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। इसके अलावा गवाहों के बयान तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल नहीं रखते हैं। यह भी सामने आया है कि आरोपित कमल रावत ने बातचीत के जरिए पीड़िता को बहला-फुसलाया।

नामजद आरोपियों की उपस्थिती पर सवाल

पुलिस का कहना है कि नामजद आरोपी विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत की घटना स्थल पर मौजूदगी के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। पुलिस ने शुरुआती जांच में संकेत दिए हैं कि यह पूरा मामला शायद बदले की भावना से पैदा हुआ है।

पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया और कहा कि किसी निर्दोष को प्रताड़ित नहीं होने दिया जाएगा। उत्तराखंड पुलिस ने महिला और बाल अपराधों के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। साथ ही, झूठी या भ्रामक शिकायतों पर भी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में आगे की जांच और पूछताछ जारी है। पुलिस ने प्रदेशवासियों से इसके प्रति जागरूक रहने की अपील की है।

विस्तृत जानकारी और नियमित अपडेट के लिए, कृपया देखें Haqiqat Kya Hai.

सादर, टीम हकीकत क्या है
संगमिता कुमारी

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