ग्लेशियल झीलों की सतत निगरानी: वसुंधरा ताल में सफल अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की स्थापना
DEHRADUN: उत्तराखंड में ग्लेशियल झीलों के फटने से संभावित खतरे को भांपने और उनकी सतत निगरानी की दिशा में उत्तराखंड ने अहम उपलब्धि हासिल की है। आपदा प्रबंधनविभागकी ओर से चमोली जिले के वसुंधरा ताल में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगा दिया गया है। सिस्टम को फिट करके वैज्ञानिकों का दल वापस लौट चुका है। उच्च […] The post ग्लेशियल झीलों की हो सकेगी सतत निगरानी, वसुंधरा ताल में सफलता से लगाया गया अर्ली वॉर्निंग सिस्टम appeared first on Devbhoomi Dialogue.
ग्लेशियल झीलों की सतत निगरानी: वसुंधरा ताल में सफल अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की स्थापना
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड ने ग्लेशियल झीलों के संभावित फटने से होने वाले खतरों की पहचान एवं उनकी निगरानी की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। चमोली जिले के वसुंधरा ताल में लगाए गए अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के जरिए वैज्ञानिकों की टीम ने इस तकनीक को सफलतापूर्वक स्थापित किया है। Haqiqat Kya Hai पर और जानें।
DEHRADUN: उत्तराखंड की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच छिपा एक बड़ा खतरा ग्लेशियल झीलों का फटना है। पिछले कुछ वर्षों में कई बार इसका दुष्प्रभाव देखने को मिला है। इसलिए, उत्तराखंड ने अपनी आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। चमोली जिले के वसुंधरा ताल में एक अत्याधुनिक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित किया गया है, जिससे इन झीलों के फटने की संभावित घटनाओं की पहले से पहचान की जा सकेगी।
जटिल भौगोलिक स्थिति में तकनीकी सफलता
इस परियोजना के तहत वैज्ञानिकों की एक टीम ने कठिन हिमालयी बर्फीले इलाकों में जाकर झील के चारों ओर विभिन्न सेंसर स्थापित किए हैं। यह प्रणाली न केवल हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं की мониторिंग में मदद करेगी, बल्कि संबंधित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी। गौरतलब है कि इस प्रणाली को स्थापित करने का कार्य 29 सितम्बर को मुख्य सचिव द्वारा हरी झंडी दिखाकर शुरू हुआ था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रणाली की स्थापना पर खुशी व्यक्त की और कहा कि यह पहल उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न संभावित खतरों की समयबद्ध पहचान करने में सहायक होगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार वैज्ञानिक शोध और तकनीकी नवाचार के माध्यम से आपदा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने पर जोर दे रही है।
अत्याधुनिक सेंसर तकनीक
वसुंधरा ताल में स्थापित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम में 'ऑल-इन-वन' मौसम सेंसर शामिल हैं, जो हवा की गति, वर्षा, तापमान, वायुदाब आदि का माप लेंगे। इसके अलावा, जल स्तर की निगरानी के लिए विशेष फ्लोटिंग और सबमर्ज्ड सेंसर लगाए गए हैं। संभावित बाढ़ की गतिविधियों की पहचान हेतु 02 एक्सेलेरोमीटर और टिल्ट सेंसर भी इस प्रणाली का हिस्सा हैं।
इसके अलावा, बर्फ की गहराई और तापमान मापन के लिए भिन्न-भिन्न सेंसर स्थापित किए गए हैं। इन सेंसरों द्वारा एकत्रित डेटा न केवल झील के वर्तमान जल स्तर का ख्याल रखेगा, बल्कि हिमस्खलन और भूगर्भीय गतिविधियों पर भी नजर रखेगा।
डेटा की अद्यतन प्रक्रिया
यह प्रणाली हर दो घंटे में आंकड़े सीबीआरआई, रुड़की और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के डैशबोर्ड पर भेजेगी। आपात स्थिति में यह सेंसर तत्काल आंकड़े भेजने में सक्षम होंगे जिससे किसी भी असामान्य परिस्थिति की पहचान में सहायता मिलेगी।
संचार प्रणाली और विद्युत आपूर्ति
इस प्रणाली में इरिडियम उपग्रह संचार तकनीक का उपयोग किया गया है, ताकि उच्च हिमालयी क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की कमी के बावजूद डेटा संचार हो सके। इसके साथ ही, सुरक्षात्मक उपायों के तौर पर सौर ऊर्जा और बैटरी का उपयोग किया गया है, जिससे सिस्टम की निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुरूप निर्माण
उपकरणों की स्थापना के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग किया गया है, और सीमेंट का उपयोग न करते हुए स्थानीय पत्थरों से फाउंडेशन को मजबूती दी गई है। इससे वायु बल के अत्यधिक प्रभाव से भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
इस नए अर्ली वॉर्निंग सिस्टम से वसुंधरा ताल की सुरक्षा और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए सुरक्षा का नया अध्याय शुरू होगा।
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Haqiqat Kya Hai
इस कदम से न केवल उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूती मिलेगी, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी यह एक मिसाल बनेगा।
इस रिपोर्ट को पढ़ने के लिए धन्यवाद। हम आपके लिए ऐसे ही और भी अपडेट लाते रहेंगे।
Team Haqiqat Kya Hai, सुमन शर्मा
What's Your Reaction?