उत्तराखंड बनेगा मौनपालन का आदर्श राज्य, धामी कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय

DEHRADUN: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में नए वित्त वर्ष में मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई। कैबिनेट विस्तार के बाद ये पहली मंत्रिमंडल बैठक थी जिसमें 18 प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। बैठक में मौनपालन नीति के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। मौनपालन का मॉडल राज्य बनेगा उत्तराखंड उत्तराखंड में शहद उत्पादन बढ़ाने […] The post मौनपालन का मॉडल स्टेट बनेगा उत्तराखंड, धामी कैबिनेट ने मौनपालन नीति को मंजूरी, जानिए अन्य बड़े फैसले appeared first on Devbhoomi Dialogue.

Apr 30, 2026 - 18:39
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उत्तराखंड बनेगा मौनपालन का आदर्श राज्य, धामी कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय

DEHRADUN: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में उत्तराखंड मंत्रिमंडल की पहली बैठक का आयोजन किया गया। नए वित्त वर्ष के प्रारंभ पर यह बैठक विशेष महत्व रखती है, जिसमें 18 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। मौनपालन नीति के प्रस्ताव पर वैधता प्राप्त करने के साथ-साथ राज्य में शहद उत्पादन को बढ़ाने के लिए नई दिशा तय की गई है।

मौनपालन का मॉडल राज्य बनेगा उत्तराखंड

उत्तराखंड में मधुमक्खी पालन को एक महत्वपूर्ण उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार ने कई अहम निर्णय लिए हैं। जंगलों के किनारे बसे जनसंख्या क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को सुविधाजनक बनाने के लिए नई नीति को मंजूरी दी गई है। एक ओर जहाँ उत्तराखंड में 71.05 प्रतिशत वन क्षेत्र है, वहीं दूसरी ओर यह कदम शहद उत्पादन को हजारों ग्रामीणों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने में सहायक होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्य सेवक सदन में आयोजित उत्तराखंड वन विकास निगम के रजत जयंती समारोह में प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु को निर्देशित किया कि इस नीति के कार्यान्वयन के लिए जल्द से जल्द एसओपी तैयार की जाए। मौनबाक्स पर सब्सिडी सहित अन्य प्रोत्साहन उपाय भी लागू किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इस व्यवसाय से जुड़े। वर्तमान में, राज्य में प्रतिवर्ष 3300 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन किया जाता है, और 10,000 से अधिक लोग इस क्षेत्र में कार्यरत हैं।

कैबिनेट के निर्णय

इस मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी थे:

  • उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई, जिसमें प्रवर्तन अधिकारियों को अब वर्दी पहनने की अनिवार्यता होगी।
  • शहरी विकास विभाग में कुंभ मेला से संबंधित कार्यों की स्वीकृति को सरल बनाया जाएगा, ताकि संबंधित अधिकारियों को त्वरित निर्णय लेने की स्वतंत्रता हो।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार विशेष शिक्षा के लिए शिक्षकों की अर्हता को निर्धारित करने वाली नियमावली को अपनाया गया।
  • परिवहन निगम को 100 बसों की प्राथमिक स्वीकृति दी गई थी, लेकिन अब जीएसटी के तहत दरों में कमी के चलते कुल 200 नई बसों की खरीद को मंजूरी दी गई है।
  • मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का लाभ 21 अशासकीय कॉलेजों तक विस्तारित किया जाएगा, जिनमें स्थायी प्रिंसिपल हैं।
  • अल्पसंख्यक शिक्षा प्राथमिकता अंतर्गत मदरसों को मान्यता देने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।
  • वन विभाग में वन दरोगा और वन आरक्षियों की शैक्षिक योग्यता और आयु सीमा में बदलाव किया गया है।

इसके अलावा, उत्तराखंड उप खनिज परिहार नियमावली को स्वीकृति दी गई है, जिससे खनिज की रॉयल्टी में वृद्धि होगी। लोक निर्माण विभाग में भी हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जिसमें दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए पदों का सृजन शामिल है।

कुल मिलाकर

धामी की कैबिनेट की यह बैठक उत्तराखंड के लिए कई महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई है। मौनपालन नीति न केवल शहद उत्पादन को बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। उद्योगों के शाश्वत विकास के लिए यह एक ठोस रणनीति है।

कम शब्दों में कहें तो, मौनपालन नीति से उत्तराखंड में मधुमक्खी पालन एक महत्वपूर्ण उद्योग के रूप में उभरेगा, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था में वृद्धि होगी।

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सुमन कुमारी
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