सीएम धामी की नाराजगी: पर्वतीय जिलों में कम ऋण-जमा अनुपात पर उठे सवाल
The post पर्वतीय जिलों के कम ऋण-जमा अनुपात पर सीएम धामी नाखुश appeared first on Avikal Uttarakhand. राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक अविकल उत्तराखंड देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में ऋण जमा अनुपात बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने के… The post पर्वतीय जिलों के कम ऋण-जमा अनुपात पर सीएम धामी नाखुश appeared first on Avikal Uttarakhand.
सीएम धामी की नाराजगी: पर्वतीय जिलों में कम ऋण-जमा अनुपात पर उठे सवाल
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पर्वतीय जिलों में कम ऋण-जमा अनुपात पर चिंता व्यक्त की है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में उन्होंने इस मुद्दे पर बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मौके पर नियमित शिविरों का आयोजन कर लें।
देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की इस बैठक में सीएम धामी ने बागेश्वर, पौड़ी, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और टिहरी के जनपदों में ऋण-जमा अनुपात की कमी पर नाराजगी प्रकट की। उनका कहना था कि सरकार की योजनाओं का लाभ लेने में लोगों को किसी भी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
राज्य की आर्थिक प्रगति में बैंकों की भूमिका
मुख्यमंत्री ने बैंकों के द्वारा आम लोगों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों तक ऋण उपलब्ध कराने में हो रही कठिनाइयों को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि बैंकों को इस दिशा में और तेजी से कार्य करना चाहिए। राज्य के विकास में बैंकिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है, और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
कम ऋण-जमा अनुपात वाले जिलों के लिए विशेष उपाय
सीएम धामी ने कहा कि जिन जनपदों में ऋण-जमा अनुपात कम है, वहां विशेष रूप से शिविरों का आयोजन किया जाना चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन, लीड बैंक और संबंधित विभागों को मिलकर काम करने के लिए भी कहा, ताकि पात्र व्यक्तियों की पहचान की जा सके और उन्हें समय पर ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
सरकार की योजनाओं का लाभ
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कई सरकारी जनकल्याणकारी योजनाएं हैं, जिनका लाभ पाने के लिए लोगों को बाधाओं का सामना नहीं करना चाहिए। यदि किसी आवेदन में कमी पाई जाती है, तो उसे तकनीकी आधार पर निरस्त करने के बजाय, संबंधित व्यक्ति को सही मार्गदर्शन देने की आवश्यकता है।
भविष्य की योजनाएं और लक्ष्य
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में वार्षिक ऋण योजना के अंतर्गत लगभग 96 प्रतिशत उपलब्धि और एमएसएमई क्षेत्र में 111 प्रतिशत उपलब्धि राज्य के बेहतर आर्थिक प्रगति का संकेत है। हालांकि, इसे और बेहतर बनाने के लिए बैंकों के बीच समन्वय आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कई योजनाओं की चर्चा की, जिनमें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना-2.0, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना, होम-स्टे योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड शामिल हैं। यह सभी योजनाएं पात्र लोगों के लिए प्राथमिकता के आधार पर ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं।
डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा
सीएम धामी ने यह भी कहा कि डिजिटल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान को गांव-गांव तक पहुंचाना जरूरी है ताकि वित्तीय समावेशन को मजबूती दी जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री जनधन योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
बैठक की विशेष पहलें
बैठक में उपस्थित मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 को बैंकों के प्रतिनिधियों से जोड़ा जाना चाहिए। इससे मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव होगी। उन्होंने विभिन्न विषयों पर विस्तृत समीक्षा और समयबद्ध समाधान के लिए उप समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने की आवश्यकता भी बताई।
मुख्यमंत्री ने इस बैठक के अंत में कहा कि अगर सरकार और बैंक मिलकर काम करें, तो राज्य में रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता को नई गति मिल सकती है, जिससे समग्र विकास की प्रक्रिया तेज होगी।
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Team Haqiqat Kya Hai, महिला संपादक
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