‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’: भारतीय लोक एवं जनजातीय कला का अद्वितीय समारोह

The post ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’- जीवंत हुई भारतीय लोक एवं जनजातीय कला appeared first on Avikal Uttarakhand. श्रेष्ठ पांच विजेता कलाकारों को 25-25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि अविकल उत्तराखण्ड देहरादून। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी), प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी,… The post ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’- जीवंत हुई भारतीय लोक एवं जनजातीय कला appeared first on Avikal Uttarakhand.

Aug 28, 2026 - 18:39
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‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’: भारतीय लोक एवं जनजातीय कला का अद्वितीय समारोह
‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’: भारतीय लोक एवं जनजातीय कला का अद्वितीय समारोह

‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’: जीवंत हुई भारतीय लोक एवं जनजातीय कला

कम शब्दों में कहें तो, 'वन्दे मातरम्–150 वर्ष' कार्यक्रम ने भारतीय लोक एवं जनजातीय कला की विविधता को उजागर किया, जहाँ 50 से अधिक कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Haqiqat Kya Hai

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी), प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के संयोजन में 'वन्दे मातरम्–150 वर्ष' शीर्षक से चार दिवसीय लोक एवं जनजातीय कला कार्यशाला, प्रदर्शनी एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 50 कलाकारों ने अपने अद्भुत कौशल का प्रदर्शन किया और भारतीय लोक एवं जनजातीय कला का समृद्ध इतिहास दर्शाया।

समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि, पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने बताया कि चित्रकला केवल एक कला नहीं, बल्कि एक साधना है। उन्होंने लोक कला की महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि यह हमें अपनी जड़ों और प्रकृति से जोड़ने का काम करती है। "एक कलाकार में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण होना चाहिए, यह हमारी कला को समाज में गहरी पैठ बनाने में मदद करता है," उन्होंने कहा।

इस कार्यक्रम में रंगकर्मी डॉ. राकेश भट्ट ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि लोक कला, संगीत और भाषा हमारी समाज की आत्मा हैं और इनका संरक्षण अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं को अपनी पारंपरिक कला को समझने और उसे संरक्षित करने के लिए प्रेरित किया, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह विरासत सुरक्षित रहे।

कार्यक्रम का आयोजन करने वाले ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की कुलसचिव डॉ. छाबड़ा ने कहा कि यह एक गौरवमयी अवसर था। इसने छात्रों और आम जनता को भारतीय लोक एवं जनजातीय कला की विविधता को समझने का एक सुनहरा अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य देश की समृद्धि की लोक एवं जनजातीय कला परंपराओं का संरक्षण करना और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना था। कलाकारों ने अपनी विशेष शैलियों में कला का निर्माण किया और विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों को कला की विविधता और तकनीकों को समझने का अवसर मिला।

चित्रकला प्रतियोगिता इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रही, जिसमें प्रतिभागियों के कार्यों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत, लुप्त होती कला शैलियों तथा मातृभूमि के प्रति सम्मान को दर्शाया। प्रतियोगिता में चयनित श्रेष्ठ पांच कलाकारों को 25-25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। विजेता कलाकारों में विशाखा गुंज्याल, मानवी सलाथिया, मीरा चौहान, आरुषि सेमवाल और हर्षदीप कौर शामिल हैं। इसके अलावा, सभी प्रतिभागियों को एनसीजेडसीसी की ओर से 2100 रुपये की सम्मान राशि भी दी जाएगी।

डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा कि 'वन्दे मातरम्–150 वर्ष' की केंद्रीय थीम को ध्यान में रखते हुए, कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन के विविध आयामों को कलाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से व्यक्त किया। विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. आलोक तीर्थ भौमिक और नीलम जयाला शामिल थे। निर्णायक मंडल में डॉ. अंजलि थापा और डॉ. शशि झा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नोडल अधिकारी डॉ. मंदाकिनी शर्मा ने इस आयोजन को पारंपरिक कला विधाओं के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए और कहा कि यह उनके लिए अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का आनंद का अवसर था।

इस आयोजन में ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के कला के प्रोफेसर, छात्रों एवं कला प्रेमियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। यह कार्यक्रम न केवल कला के लिए एक मंच प्रदान करता है, बल्कि युवा पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक संपदा की ओर प्रेरित करता है।

इसके अलावा, इस प्रकार की कार्यशालाएं समाज में कला के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य भी करती हैं, जिससे युवा पीढ़ी संस्कृति के प्रति जागरूक हो सके। इस कार्यक्रम ने भारतीय लोक एवं जनजातीय कला को एक नया जीवनयापन देने का कार्य किया है।

कार्यक्रम की समाप्ति ने यह स्पष्ट किया कि कला सिर्फ रंगों का खेल नहीं, बल्कि यह समाज की भावना, उसकी जड़ों एवं संस्कृति का अद्वितीय प्रदर्शन है। यह आयोजन भारतीय कला के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

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संपादक: नंदिनी शर्मा
Team Haqiqat Kya Hai

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