पुलिस हिरासत में पत्रकार हेम भट्ट को मिलेगा न्याय: मुख्यमंत्री धामी का आश्वासन
The post पुलिस हिरासत मामले पर पत्रकार हेम को न्याय मिलेगा- धामी appeared first on Avikal Uttarakhand. हेम भट्ट प्रकरण में मुख्यमंत्री धामी ने निष्पक्ष कार्रवाई के दिए निर्देश अविकल उत्तराखंड देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बुधवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट… The post पुलिस हिरासत मामले पर पत्रकार हेम को न्याय मिलेगा- धामी appeared first on Avikal Uttarakhand.
पुलिस हिरासत में पत्रकार हेम भट्ट को मिलेगा न्याय: मुख्यमंत्री धामी का आश्वासन
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कम शब्दों में कहें तो, पत्रकार हेम भट्ट की हिरासत पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न्याय की गारंटी दी है। मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए हैं।
देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में अपनी कैंप कार्यालय में वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने पत्रकार के मामले को गंभीरता से सुनते हुए पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस मामले में निष्पक्ष और न्यायपूर्ण कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई कर हेम भट्ट को न्याय दिलाने की हर संभव कोशिश की जाएगी।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब 23 मई को देहरादून पुलिस ने सुबह 4 बजे पत्रकार हेम भट्ट को उनके घर से उठाया। उन पर ईनामी अपराधी प्रदीप सकलानी से कथित संबंधों का आरोप लगाया गया। इस दौरान भट्ट को 12 घंटे तक पूछताछ के बाद छोड़ा गया, जिसके विरोध में मीडिया समुदाय ने आवाज उठाई। बाद में हेम भट्ट ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
पत्रकारों के एक समूह ने इस मामले के संदर्भ में सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी से मुलाकात की और उनके जरिए हेम भट्ट को न्याय दिलाने की मांग की। सीएम धामी ने 28 मई को हेम भट्ट के परिवार से मिलकर उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया, जिससे उन्हें उम्मीद जगी है।
कमियों को देखते हुए, विपक्षी दल और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर गहरा सवाल उठाया है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत, भाजपा विधायक अरविंद पांडे, और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल जैसे नेताओं ने इस मामले में पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
यह घटना न केवल पत्रकारिता के अधिकारों का बल्कि मानवाधिकारों का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। कई पत्रकार संगठनों ने इसे हिदायत देते हुए स्वतंत्र पत्रकारिता पर गंभीर खतरे के रूप में पेश किया है।
इस मामले से यह साफ हो गया है कि मीडिया को दबाने की कोशिशें किसी भी समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। सीएम धामी का यह आश्वासन उम्मीद की एक किरण है कि पत्रकारिता के अधिकारों का सम्मान किया जाएगा। आगे चलकर देखना होगा कि क्या पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई के परिणाम से हेम भट्ट को न्याय मिलेगा या नहीं।
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यह सहानुभूति और सक्रियता पत्रकारों को अपने दायित्वों को निभाने में और अधिक मददगार साबित हो सकती है।
सादर,
टीम हकीकत क्या है
सुमन शर्मा
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