दूरदर्शन देहरादून का 26वां स्थापना दिवस: सांस्कृतिक धरोहर का जश्न
संवादसूत्र देहरादून: दूरदर्शन केंद्र, देहरादून का 26वां स्थापना दिवस बुधवार को संस्कृति विभाग सभागार में भव्य ‘सांस्कृतिक संध्या’ के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में दूरदर्शन की सार्वजनिक प्रसारण परंपरा के साथ उत्तराखंड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत, लोकसंगीत और लोकनृत्य की विविध झलक देखने को मिली। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय मानक ब्यूरो के निदेशक […]
दूरदर्शन देहरादून का 26वां स्थापना दिवस: सांस्कृतिक धरोहर का जश्न
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कम शब्दों में कहें तो, दूरदर्शन केंद्र देहरादून ने अपने 26वें स्थापना दिवस का आयोजन एक भव्य सांस्कृतिक संध्या के रूप में किया। इस कार्यक्रम ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और कलाओं को जीवंत किया।
संस्थान का गौरवपूर्ण इतिहास
दूरदर्शन केंद्र, देहरादून का इतिहास यहां की सांस्कृतिक धरोहर से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसकी स्थापना से लेकर आज तक यह केंद्र न केवल मनोरंजन का साधन रहा है बल्कि उत्तराखंड की लोक-संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का भी कार्य करता आ रहा है।
सांस्कृतिक संध्या का आयोजन
बुधवार को संस्कृति विभाग सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड की लोक-संगीत और नृत्य की विविधता को प्रदर्शित किया गया। यहां के कलाकारों ने रंग-बिरंगे परिधानों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। भारतीय मानक ब्यूरो के निदेशक हेमंत बी. आडे ने इस अवसर पर सांस्कृतिक महत्व पर जोर दिया।
लोक-संगीत और लोक-नृत्य की विविधता
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक लोकगीतों और नृत्यों ने सभी को जोड़े रखा। झोड़ा,ieniu, और बकरी छुड़ाने जैसे लोक नृत्य प्रस्तुत किए गए, जबकि जौनसरी और कुमाऊंनी लोकगीतों ने माहौल को महकाया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की संस्कृति को नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करना था, ताकि वे इसकी मूल्य और महत्व को समझ सकें।
स्थानीय प्रतिभाओं को प्रमोट करना
इस तरह के आयोजनों से न केवल स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता है, बल्कि ये उत्तराखंड की समृद्ध विरासत को संरक्षित और विस्तारित करने का भी कार्य करते हैं। इस अवसर पर कई नई प्रतिभाओं को अपनी कला प्रस्तुत करने का मौका मिला। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि संस्कृति केवल एक परंपरा नहीं होती, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य के बीच का एक सेतु है।
अंत की ओर
दूरदर्शन देहरादून का 26वां स्थापना दिवस एक ऐसा आयोजन बन गया, जिसमें न केवल मनोरंजन का पहलू शामिल था, बल्कि यह उत्तराखंड के लोक-संस्कृति की गरिमा को भी दर्शाता था। भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहना चाहिए ताकि हमारी संस्कृति जीवित रहे।
फिर से कहें तो, यह संध्या केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव थी जिसने हर दर्शक के दिल में उत्तराखंड की कला और संस्कृति के प्रति गर्व का भाव भर दिया।
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