डीएवी कॉलेज समारोह में अभद्र भाषा पर पूर्व सीएम तीरथ का कड़ा बयान
The post डीएवी कॉलेज गाली प्रकरण- पूर्व सीएम तीरथ ने घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण appeared first on Avikal Uttarakhand. ‘शैक्षणिक संस्थानों में फूहड़ता नहीं होगी बर्दाश्त’-तीरथ अविकल उत्तराखंड देहरादून। डीएवी पीजी कॉलेज में छात्रसंघ समारोह के दौरान मंच से एक कलाकार द्वारा कथित अभद्र भाषा के प्रयोग और आपत्तिजनक… The post डीएवी कॉलेज गाली प्रकरण- पूर्व सीएम तीरथ ने घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण appeared first on Avikal Uttarakhand.
डीएवी कॉलेज समारोह में अभद्र भाषा पर पूर्व सीएम तीरथ का कड़ा बयान
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कम शब्दों में कहें तो पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने डीएवी कॉलेज के छात्रसंघ समारोह के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले कलाकार की निंदा की है। उन्होंने इसे देवभूमि की संस्कृति पर आघात माना।
देहरादून: हाल ही में डीएवी पीजी कॉलेज में आयोजित छात्रसंघ समारोह के दौरान मंच से एक कलाकार द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इस पूरी घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटिताएं सिर्फ व्यक्तियों को ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
पूर्व सीएम ने कहा, “आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करना अत्यंत निंदनीय है। क्या इस तरह के कलाकारों को कार्यक्रम में आमंत्रित करना उचित है? यह जन प्रेस्टीज को कम करता है और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग प्रतीत होता है।”
तीरथ रावत ने स्पष्ट किया कि शिक्षण संस्थाओं के प्रसंग में इस प्रकार की फूहड़ता को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षण संस्थानों को चाहिए कि वो छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करें।
उन्होंने कहा, “हमें स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान कर सके। हमारी संस्कृति को आगे बढ़ाना जरूरी है और इस तरह की फूहड़ता को पीछे छोड़ना चाहिए।”
एक सकारात्मक बदलाव के लिए, तीरथ ने सुझाव दिया कि महाविद्यालयों को विभिन्न संस्थानों के छात्रों को आमंत्रित करना चाहिए ताकि वे प्रतियोगिताएं आयोजित कर सकें। इससे छात्रों में स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी और फूहड़ता की प्रवृत्तियां कम होंगी।
इस मामले पर उनकी प्रतिक्रिया ने प्रदेशवासियों के बीच एक नई चर्चा को जन्म दिया है। उन्होंने स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन में रचनात्मकता और सकारात्मकता पर जोर दिया जाना चाहिए। यदि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति होती है, तो ऐसे कार्यक्रमों और कलाकारों को सार्वजनिक रूप से निंदा की जानी चाहिए।
डीएवी कॉलेज की घटना ने एक बार फिर शिक्षा प्रणाली में सुधार और सांस्कृतिक मूल्यों के पालन की आवश्यकता को उजागर किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तीरथ ने कहा कि सभी शैक्षणिक संस्थाओं को एक जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी।
इस प्रकार की घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि हमें हमारी संस्कृति और सामाजिक मान्यताओं को कैसे बचाना है। ऐसे हालात में जागरूक होने की आवश्यकता है ताकि युवा पीढ़ी सही दिशा में बढ़ सके।
इसके अलावा, तीरथ ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे आगे आकर ऐसे कार्यक्रमों में अपने विचार साझा करें जो समाज को सुरक्षित और सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकें।
इस पूरी घटना से यह सबक मिलता है कि हमारे शिक्षण संस्थानों में अनुशासन और सजगता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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