जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का महत्वपूर्ण संदेश: वैश्विक साझेदारी की आवश्यकता
16 June. 2026. फ्रांस के एवियन में G7 आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आधार ‘मानवता पहले’ होना चाहिए, शांति और स्थिरता के Continue Reading » The post G7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का संदेश: वैश्विक साझेदारी में भरोसा, पारदर्शिता और समान भागीदारी जरूरी appeared first on Mirror Uttarakhand.
जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का महत्वपूर्ण संदेश: वैश्विक साझेदारी की आवश्यकता
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कम शब्दों में कहें तो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 सम्मेलन में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के लिए मानवता को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
16 जून, 2026 को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 के आउटरीच सत्र 'फोर्जिंग न्यू पार्टनरशिप्स एंड रीबिल्डिंग इंटरनेशनल सॉलिडैरिटी' में संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आधार मानवता पहले होना चाहिए। उन्होंने शांति और स्थिरता के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वैश्विक चुनौतियों का समाधान
पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए भरोसे, पारदर्शिता और मजबूत साझेदारी के महत्व पर विचार किया। उन्होंने कहा कि आज की जुड़ी हुई दुनिया में ऊर्जा, खाद्य, स्वास्थ्य, साइबर और आर्थिक सुरक्षा आपस में गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि इसकी आवश्यकता है।
विश्वास का संकट और कोविड-19 का संदर्भ
उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए व्यापार और प्रौद्योगिकी के संकीर्ण स्वार्थों के दुरुपयोग के कारण उत्पन्न हो रहे विश्वास के संकट का उल्लेख किया। कोविड-19 महामारी ने यह स्पष्ट किया है कि देशों को आपसी विश्वास और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान देना होगा।
भारत का समावेशी दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री ने भारत के अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दृष्टिकोण को साझा करते हुए कहा कि भारत सदैव 'मानवता पहले' के सिद्धांत पर आधारित रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI), ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस और अन्य महत्वपूर्ण अभियानों को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
प्राकृतिक आपदाओं में मदद का अनुभव
भारत ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं के समय में मदद के लिए सबसे पहले आगे बढ़कर अपनी भूमिका निभाई है। चाहे श्रीलंका में चक्रवात हो, अफगानिस्तान में भूकंप, या मोजाम्बिक में बाढ़, भारत ने हर संकट में सहयोग का हाथ बढ़ाया है। यह समावेशी दृष्टिकोण भारत की वैश्विक भूमिका को और अधिक मजबूती प्रदान करता है।
सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ना
प्रधानमंत्री ने भारत की सतत विकास यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत ने वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सुरक्षा और महिला नेतृत्व वाले विकास को नई गति दी है।
साझा स्वामित्व का सिद्धांत
पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के विकास के लिए दाता-प्राप्तकर्ता (Donor-Recipient) मॉडल से आगे बढ़कर समान भागीदारी और साझा स्वामित्व का सिद्धांत अपनाने की बात की। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति सम्मान की कमी वैश्विक एकता की स्थापना में एक बड़ी बाधा है।
शांति और स्थिरता की प्रेरणा
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने के माध्यम से शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मजबूत और टिकाऊ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के लिए सहयोग, विश्वास और समान भागीदारी ही आगे का मार्ग है।
भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सकारात्मक भूमिका निभाई है और इस तरह की पहलों से हम सभी को मिलकर दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के प्रयासों में सहयोग करना चाहिए।
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सादर, टीम हक़ीक़त क्या है, (साक्षी शर्मा)
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