उत्तराखंड राज्य पशु चिकित्सा परिषद की महत्वपूर्ण बैठक में नये नियमों पर मंथन
The post पशु चिकित्सा परिषद की बैठक appeared first on Avikal Uttarakhand. नई नियमावली पर मंथन पशुचिकित्साविदों के कौशल विकास पर जोर अविकल उत्तराखंड देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद की द्वितीय कार्यकारिणी की पहली बैठक बुधवार को परिषद सभागार में अध्यक्ष डॉ.… The post पशु चिकित्सा परिषद की बैठक appeared first on Avikal Uttarakhand.
उत्तराखंड राज्य पशु चिकित्सा परिषद की महत्वपूर्ण बैठक में नये नियमों पर मंथन
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड राज्य पशु चिकित्सा परिषद की द्वितीय कार्यकारिणी की पहली बैठक में नए नियमों और पशुचिकित्साविदों के कौशल विकास पर जोर दिया गया।
देहरादून। उत्तराखंड राज्य पशु चिकित्सा परिषद की द्वितीय कार्यकारिणी की पहली बैठक बुधवार को परिषद सभागार में अध्यक्ष डॉ. कैलाश उनियाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में पदाधिकारियों ने परिषद की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न उपायों पर चर्चा की, जिसमें पशुचिकित्साविदों के कौशल विकास और प्रस्तावित उत्तराखंड पशुचिकित्सा परिषद नियमावली-2026 के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर मंथन किया गया।
बैठक में उपस्थित सदस्य
बैठक में पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. उदय शंकर, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के अधिष्ठाता के प्रतिनिधि डॉ. मंजुल काण्डपाल और रजिस्ट्रार डॉ. प्रलयंकर नाथ सहित नवनिर्वाचित तथा नामित सदस्य उपस्थित थे। रजिस्ट्रार ने नवनिर्वाचित एवं नामित सदस्यों को भारतीय पशुचिकित्सा परिषद अधिनियम, 1984 के प्रमुख प्रावधानों के बारे में जानकारी दी।
कौशल विकास पर जोर
परिषद द्वारा प्रदेश के पशुचिकित्साविदों के कौशल विकास में वृद्धि और नई पशुचिकित्सा तकनीकों से अवगत कराने के लिए सतत पशुचिकित्सा शिक्षा (सीवीई) कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया गया। डॉ. उदय शंकर ने कार्यकारिणी को मजबूती प्रदान करने और पशुचिकित्साविदों के हित में काम करने के लिए सुझाव दिए।
नियमावली-2026 का अनुमोदन
बैठक में अध्यक्ष डॉ. कैलाश उनियाल ने बताया कि प्रस्तावित उत्तराखंड पशु चिकित्सा परिषद नियमावली-2026 को शासन को भेजा जा चुका है। शासन से अनुमोदन मिलने के बाद परिषद पशुपालकों और पशुचिकित्साविदों के हित में अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगी। इस नियमावली के माध्यम से परिषद को अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए आवश्यक विधिक अधिकार भी प्राप्त होंगे।
आगामी चुनौतियां और संभावनाएं
इस बैठक का महत्व केवल नीतियों के निर्माण तक ही सीमित नहीं हैं। बल्कि, यह पशुपालन क्षेत्र में सुधार लाने और पशुचिकित्सा सेवाओं को अधिक सुगम बनानें की दिशा में आधुनिकीकरण की एक दिशा है। जैसा की हम जानते हैं, पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है एवं इससे उतपन्न होने वाले उत्पादों का संपूर्ण समाज पर गहरा असर पड़ता है।
अवश्य ध्यान दें कि यह परिषद नए नियमों और नीतियों के माध्यम से पशुपालकों के लिए एक सक्षम और संरक्षित वातावरण प्रदान करने का संकल्प कर रही है। नवनिर्वाचित सदस्य डॉ. राहुल कुमार जोशी, डॉ. आलोक कुडियाल, डॉ. दीप्ति अरोड़ा और डॉ. कमल दुर्गापाल सहित नामित सदस्य डॉ. अमित देवराड़ी, डॉ. कल्पेन्द्र कोहली, और डॉ. रचना कुमारी ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
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लेख के अंत में, यह स्पष्ट है कि पशु चिकित्सा परिषद की बैठक ने न केवल किसानों और पशुविज्ञान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि नए नियम और शिक्षण कार्यक्रम कैसे स्थानीय समुदायों के विकास में योगदान कर सकते हैं।
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