उत्तराखंड के हर्बल उत्पादों के लिए एफटीए से आयुष निर्यात को नई गति मिलेगी
संवादसूत्र देहरादून, 9 जून: भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने मंगलवार को देहरादून के सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र में आयुष मंत्रालय और आयुष निर्यात संवर्धन परिषद (AYUSHEXCIL) के सहयोग से क्षेत्रीय आउटरीच कार्यक्रम एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया। कार्यक्रम का विषय था— “आयुष एवं हर्बल के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (एफटीए) का लाभ […]
उत्तराखंड के हर्बल उत्पादों के लिए एफटीए से आयुष निर्यात को नई गति मिलेगी
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कम शब्दों में कहें तो, भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने हाल ही में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (एफटीए) के माध्यम से आयुष निर्यात को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस पहल से उत्तराखंड के हर्बल उत्पादों को वैश्विक बाजारों में एक नई पहचान मिलेगी।
संवादसूत्र देहरादून, 9 जून: मंगलवार को देहरादून के सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र में आयुष मंत्रालय और आयुष निर्यात संवर्धन परिषद (AYUSHEXCIL) के सहयोग से एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय आउटरीच कार्यक्रम और प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय था— “आयुष एवं हर्बल के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (एफटीए) का लाभ उठाना और उत्तराखंड के लिए अवसर।”
कार्यक्रम का उद्देश्य
इस कार्यक्रम का उद्देश्य आयुष की क्षेत्र में प्रभावशाली एफटीए के लाभों को उजगार करना था। इसमें यह बताया गया कि कैसे एफटीए के माध्यम से आयुष उत्पादों की वैश्विक पहुंच को बढ़ाया जा सकता है, विशेष रूप से उत्तराखंड में उत्पादित हर्बल उत्पादों के संदर्भ में। इस पहल से न केवल प्रदेश के हर्बल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह स्थानीय किसानों और उत्पादकों के लिए भी एक आर्थिक अवसर पैदा करेगा।
आयुष निर्यात के क्षेत्र में संभावनाएं
आयुष उत्पाद, जैसे कि जड़ी-बूटियां, औषधीय पौधे और हर्बल औषधियाँ, जो पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का आधार हैं, अब वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई हैं। जैसे-जैसे विश्व में प्राकृतिक और औषधीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है, उत्तराखंड के उत्पादों को एफटीए के तहत बेहतर बाजार मिलेगें। इस स्थिति में, आयुष मंत्रालय और AYUSHEXCIL की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
स्थानीय उत्पादन और निर्यात में वृद्धि
इस पहल से स्थानीय उत्पादन में वृद्धि देखने को मिल सकती है। जब अधिक आयुष उत्पाद वैश्विक स्तर पर निर्यात किए जाएंगे, तो इसके साथ ही स्थानीय किसानों को इससे लाभ होगा। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि एफटीए का लाभ उठाकर रासायनिक उत्पादों की तुलना में हरित उत्पादों की मांग को भी बढ़ाया जा सकता है।
समापन विवरण
भारत सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से न केवल आयुष निर्यात को स्पीड मिलेगी, बल्कि उत्तराखंड के हर्बल उत्पादों को भी वैश्विक मंच पर एक नई पहचान मिलेगी। उत्तरी भारत के इस पर्वतीय राज्य के हर्बल उत्पादों को एक नई दिशा में ले जाने के लिए यह एक सुनहरा अवसर है।
अंत में, हम सभी को चाहिए कि हम अपने हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता और मानक को बनाए रखें ताकि हम वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। ऐसा करने से न केवल हमारे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि हमें स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी अवसर मिलेगा।
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– Team Haqiqat Kya Hai, प्रिया शर्मा
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