उत्तराखंड के प्रधानाध्यापक नफीस अहमद की नियुक्ति पर सवाल उठे, विभागीय जांच में कथित गड़बड़ी

The post प्रधानाध्यापक नफीस अहमद की नियुक्ति पर विभागीय शिकंजा appeared first on Avikal Uttarakhand. 18 वर्ष से कम आयु में नौकरी पाने के आरोपों पर कार्रवाई के निर्देश जांच में शिकायत के तथ्यों की हुई पुष्टि 41 साल पुराने नियुक्ति विवाद ने फिर पकड़ा… The post प्रधानाध्यापक नफीस अहमद की नियुक्ति पर विभागीय शिकंजा appeared first on Avikal Uttarakhand.

Jun 16, 2026 - 09:39
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उत्तराखंड के प्रधानाध्यापक नफीस अहमद की नियुक्ति पर सवाल उठे, विभागीय जांच में कथित गड़बड़ी
उत्तराखंड के प्रधानाध्यापक नफीस अहमद की नियुक्ति पर सवाल उठे, विभागीय जांच में कथित गड़बड़ी

प्रधानाध्यापक नफीस अहमद की नियुक्ति पर विभागीय शिकंजा

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में 41 साल पुराना नियुक्ति विवाद एक बार फिर सामने आया है, जिसमें प्रधानाध्यापक नफीस अहमद की आयु विवादित पाई गई है। इस मुद्दे पर विभागीय जांच का आदेश दिया गया है।

देहरादून/पौड़ी। उत्तराखंड में शिक्षा विभाग में एक बार फिर से एक पुराना नियुक्ति विवाद गर्मा गया है। कोटद्वार क्षेत्र के प्रधानाध्यापक नफीस अहमद की प्रारंभिक नियुक्ति को लेकर जांच शुरू की गई है। रिपोर्ट में पाया गया है कि नफीस की नियुक्ति उस समय हुई थी जब उनकी आयु 18 वर्ष से कम थी। यह मामला शिक्षा विभाग में नियुक्तियों की पारदर्शिता और वैधता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

जांच में शिकायत के तथ्य सामने आए

जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने जिला शिक्षा अधिकारी, पौड़ी गढ़वाल को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आरोप है कि नफीस अहमद की जन्मतिथि 8 अगस्त 1967 बताई गई है, जबकि उन्होंने 29 मार्च 1985 को सहायक अध्यापक (उर्दू) पद पर कार्यभार ग्रहण किया। यह दर्शाता है कि उनकी आयु नियुक्ति के समय मात्र 17 वर्ष 7 माह 11 दिन थी।

शिकाग का प्रारंभ और उसकी निष्पत्ति

इस मामले की जांच के लिए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उप शिक्षा अधिकारी, दुगड्डा से आख्या मांगी गई। जिन अभिलेखों की जांच की गई, उनमें नफीस की जन्मतिथि स्पष्ट रूप से दर्ज है। इसके बाद निदेशालय ने माना कि शिकायत में उठाया गया तथ्य सही पाया गया है।

अविकल उत्तराखंड की जांच का प्रकाशन

यह विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। “अविकल उत्तराखंड” ने कुछ समय पूर्व इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। शिकायतकर्ता विपिन डोबरियाल ने दावा किया था कि आयु संबंधी नियमों की अनदेखी की गई थी और नफीस को बालिग होने से पहले सरकारी सेवा में नियुक्त किया गया। इस प्रकरण ने लंबे समय से फाइलों में दबे रहने के बाद अब एक नई दिशा में आगे बढ़ाया है।

चार दशक पुराना विवाद और आगे की कार्रवाई

आगे की कार्रवाई का प्रश्न अब यह है कि इस चार दशक पुराने विवाद में विभागीय प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका नफीस के सेवा संबंधी प्रभाव क्या होगा। वर्तमान में नफीस अहमद प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं, और देखना यह होगा कि क्या उन्हें इस विवादों के बीच कोई दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

नफीस अहमद की नियुक्ति

इस प्रकार, नफीस अहमद की नियुक्ति पर उठे सवाल ने शिक्षा विभाग को फिर से जांच की ओर अग्रसरित किया है। जैसे-जैसे यह प्रकरण बढ़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस तथ्य की जांच से शिक्षा के क्षेत्र में कोई सुधार होगा या यह मात्र एक औपचारिकता रह जाएगा।

उम्मीद है कि इस मामले की निष्पत्ति विभागीय अधिकारियों द्वारा सही तरीके से की जाएगी और भविष्य में इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

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सादर,
नेहा कुमारी,
टीम "Haqiqat Kya Hai"

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