उत्तराखंड के अनाजों पर पोषण का शोध: ICMR-NIN में मंडुआ से रागी तक की महत्वपूर्ण जानकारी
संवादसूत्र देहरादून/हैदराबाद: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत पीआईबी देहरादून द्वारा आयोजित हैदराबाद प्रेस दौरे के दूसरे दिन उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) का दौरा किया। इस दौरान पत्रकारों को पोषण अनुसंधान, जन स्वास्थ्य शिक्षा और राष्ट्रीय नीतियों व कल्याणकारी कार्यक्रमों में संस्थान के […]
उत्तराखंड के अनाजों पर पोषण का शोध: ICMR-NIN में मंडुआ से रागी तक की महत्वपूर्ण जानकारी
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के पारंपरिक अनाजों पर पोषण शोध चालू है, जहाँ मंडुआ से लेकर रागी तक की विशेषता पर ध्यान दिया गया है। हाल ही में, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) ने अपने शोध में इन अनाजों की पोषण सामग्री और उनकी प्रासंगिकता को समझने का प्रयास किया।
अध्ययन का उद्देश्य
उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने पीआईबी देहरादून द्वारा आयोजित हैदराबाद प्रेस दौरे के तहत ICMR-NIN का दौरा किया। इस दौरान पत्रकारों को बताया गया कि कैसे इन अनाजों का पोषण मूल्य, स्वास्थ्य पर प्रभाव, और स्थानीय भोजन के कल्याणकारी कार्यक्रमों में योगदान किया जा रहा है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य है कि कैसे इन अनाजों का उपयोग पोषण के स्तर को सुधारने में किया जा सकता है।
पोषण के विविध पहलू
ICMR-NIN में आयोजित इस शोध में मौजूदा वैश्विक पोषण संकट के संदर्भ में भारत के स्थानीय खाद्य पदार्थों का महत्व उजागर किया गया। मंडुआ, जोकि एक स्वास्थ्यवर्धक अनाज है, उसकी फाइबर, प्रोटीन, और खनिज यौगिकों के स्तर की जांच की गई है। रागी, जोकि कैल्शियम का समृद्ध स्रोत है, भी अध्ययन का एक मुख्य हिस्सा है।
स्थानीय खेती और उसके फायदे
उत्त्तराखंड के किसान इन अनाजों को उगाने में पारंपरिक तरीके का पालन कर रहे हैं, जिससे न केवल उनकी सेहत में सुधार हो रहा है बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यह शोध दर्शाता है कि यदि स्थानीय खाद्य पदार्थों को सही तरीके से पोषण के कार्यक्रमों में शामिल किया जाए तो यह न केवल कृषि विकास को बढ़ावा देगा बल्कि खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकेगा।
मीडिया का नजरिया
पत्रकारों ने ICMR-NIN के वैज्ञानिकों से बातचीत के दौरान यह महसूस किया कि यह केंद्र न केवल शोध में समर्पित है, बल्कि यह जन स्वास्थ्य शिक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ICMR-NIN के निदेशक ने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय अनाजों का उचित उपयोग न केवल पोषण स्तर को ऊँचा उठाता है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों को सशक्त बनाता है।
निष्कर्ष
अंत में, यह स्पष्ट हो चुका है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "मेरा भोजन, मेरी सुरक्षा" जैसी पहल के अंतर्गत, ICMR-NIN का यह शोध एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सेहत में सुधार किया जा सकता है। ऐसे प्रयास न केवल हमारे अनाजों की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं, बल्कि देश की स्वास्थ्य नीति को भी मजबूत करते हैं।
इसके साथ ही, आगे बढ़ते हुए मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने निर्णय लिया कि इस प्रकार के अनुसंधान को जनता के सामने लाना आवश्यक है ताकि हर कोई अपने स्वास्थ्य की देखभाल कर सके।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया हमारी वेबसाइट Haqiqat Kya Hai पर जाएँ।
सादर, सुमन तिवारी
टीम Haqiqat Kya Hai
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