अंकिता भंडारी हत्याकांड: हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिकाएं, न्याय की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम

NAINITAL: अंकिता भंडारी हत्याकांड के आरोपियों को नैनीताल हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। इस मामले में लोअर कोर्ट से दोषी ठहराए गए पुलिकत आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर की जमानत याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। प्रदेश सरकार की ओर से की गई मजबूत और प्रभावी पैरवी के चलते आरोपियों को […] The post अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे अंकिता भंडारी के हत्यारे, हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिकाएं appeared first on Devbhoomi Dialogue.

Aug 20, 2026 - 00:39
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अंकिता भंडारी हत्याकांड: हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिकाएं, न्याय की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम
अंकिता भंडारी हत्याकांड: हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिकाएं, न्याय की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम

अंकिता भंडारी हत्याकांड: हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिकाएं, न्याय की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम

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कम शब्दों में कहें तो, नैनीताल हाईकोर्ट ने अंकिता भंडारी हत्याकांड के तीन मुख्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। यह निर्णय प्रदेश सरकार की मजबूत पैरवी के बाद आया है।

NAINITAL: अंकिता भंडारी हत्याकांड में आरोपियों को नैनीताल हाईकोर्ट की तरफ से बड़ा झटका मिला है। जिन्होंने पहले से ही लोअर कोर्ट से दोषी ठहराए जाने के बाद अपनी जमानत के लिए याचिका डाली थी, उन्हें अब और अधिक इंतजार करना होगा। अदालत ने पुलिकत आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जो पिछले कुछ समय से जेल में हैं।

न्याय के प्रति प्रतिबद्धता

प्रदेश सरकार ने मामले में सख्त रुख अपनाया और आरोपियों को जमानत देने का विरोध किया। सरकारी वकील ने न्यायालय में कहा कि यह मामला केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए। पूरे मामले की शुरुआत से ही सरकार ने जांच को मजबूत करने और अभियोजन को प्रभावी रखने का प्रयास किया है ताकि दोषियों को कठोर सजा मिल सके। पहले ही तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, और अब जमानत याचिकाओं के खारिज होने से यह स्पष्ट होता है कि न्याय की प्रक्रिया सही दिशा में चल रही है।

हाईकोर्ट की सुनवाई

नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले पर लगातार दो दिनों तक गहन सुनवाई की। जज रवींद्र मैठाणी और जज सिद्धार्थ शाह की बेंच के समक्ष दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। बचाव पक्ष के वकीलों ने जमानत के समर्थन में कई तर्क दिए, लेकिन अभियोजन पक्ष ने अपने साक्ष्यों और सबूतों के आधार पर जोरदार विरोध किया। इस दौरान यह स्पष्ट हो गया कि मामले में सबूतों की स्थिति कितनी मजबूत है, जिससे जमानत याचिका का खारिज होना स्वाभाविक था।

घटनाक्रम का संक्षेप में अवलोकन

आपको बता दें कि अंकिता भंडारी 18 सितंबर 2022 को ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम कर रही थी। वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई, और 24 सितंबर को उसका शव चीला बैराज में मिला। पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों के कारण रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और कर्मचारी अंकित गुप्ता से पूछताछ की और तभी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

30 मई 2025 को कोटद्वार कोर्ट ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस तरह के गंभीर आरोपों पर सुनवाई के दौरान जमानत याचिकाओं का खारिज होना न्याय प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।

सरकारी पहल का महत्व

सरकार की ओर से की गई इस मजबूत पहल को न्याय की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सामाजिक सिद्धांतों और कानून के अंतर्गत व्यवस्थाओं को बनाए रखना समय की जरूरत है। ऐसे मामलों में न्यायालय का त्वरित और उचित फैसला निश्चित रूप से पीड़ित परिवार के लिए एक सुकून लेकर आता है।

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निष्कर्षतः, नैनीताल हाईकोर्ट का यह फैसला उस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, जहां कानून अपने गुनहगारों को सजा देने में सक्षम है, और यह दर्शाता है कि न्याय की प्रक्रिया में कभी भी समझौता नहीं किया जाएगा।

सादर,

टीम हकीकत क्या है

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