अंकिता भंडारी केस: माता-पिता का इंडिया गेट पर धरना, VIP दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर सवाल
NEW DELHI: अंकिता भंडारी केस में कथित वीआईपी दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के खिलाफ अंकिता के माता-पिता ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए इंडिया गेट पर धरना प्रदर्शन किया।परिवार ने राष्ट्रपति से अपील की है कि जब तक मामले की सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत […] The post अंकिता केस में VIP को ईनाम के खिलाफ माता पिता का इंडिया गेट पर धरना, राहुल प्रियंका ने की मुलाकात appeared first on Devbhoomi Dialogue.
अंकिता भंडारी केस: माता-पिता का इंडिया गेट पर धरना
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नई दिल्ली: अंकिता भंडारी मामले में कथित वीआईपी दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के खिलाफ अंकिता के माता-पिता ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए इंडिया गेट पर धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन इसलिए किया गया ताकि परिवार की अपील पर ध्यान दिया जा सके कि जब तक मामले की सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
कम शब्दों में कहें तो, अंकिता भंडारी के माता-पिता ने इंडिया गेट पर धरना देकर सीबीआई जांच की मांग की। राजनीतिक हस्तियों ने भी इस मौके पर उनका समर्थन किया।
धरणा प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
अंकिता भंडारी के परिवार ने पिछले कई दिनों से सीबीआई जांच की मांग को लेकर आंदोलन किया है। परिवार का कहना है कि सीबीआई जांच की घोषणा के बाद से अब तक मामले में किसी भी प्रकार की प्रगति नहीं हुई है। अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी का कहना है कि मामले में उनकी बेटी की चैट में जिन वीआईपी को जिक्र किया गया है, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, दुष्यंत गौतम को राज्यपाल के पद पर नियुक्त किया गया है। इस क्रम में न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठते हैं।
राहुल और प्रियंका गांधी का साथ
धरने की खबरें सुनने के बाद, कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने अंकिता के माता-पिता को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। राहुल गांधी ने कहा, “हम अंकिता के परिवार की हरसंभव मदद करेंगे। यह अमानवीय है कि पिछले चार वर्षों से उन्हें इंसाफ नहीं मिला, और एक 'VIP' आरोपी को संवैधानिक पद का इनाम दिया गया है।”
राहुल गांधी ने भाजपा पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे हालात में उम्मीद करने का कोई मतलब नहीं। जहां बलात्कारियों और हत्यारों का स्वागत होता हो, वहां न्याय की उम्मीद रखना बेमक़सद है।
आंदोलन का महत्व
इस धरने में अंकिता के माता-पिता ने सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना का समर्थन लिया। उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की है कि जब तक सीबीआई जांच पूरी नहीं होती, तब तक दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रोकनी चाहिए। यह घटना केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त असमानता और नैतिकता पर भी सवाल उठाने वाली है।
इस मांग का महत्व और अधिक बढ़ जाता है जब हम देखते हैं कि कई ऐसे मामले हैं, जहाँ महिलाएँ न्याय पाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। अंकिता का केस इस बात का प्रतीक बन गया है कि कैसे एक परिवार अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है।
सीबीआई की जांच की स्थिति ने भी इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, और प्रोसेस के प्रति पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करता है।
निष्कर्ष
इस तरह के आंदोलनों से यह स्पष्ट होता है कि न्याय कितना महत्वपूर्ण है और समाज को ऐसे मुद्दों पर एकजुटता दिखानी चाहिए। अंकिता भंडारी का केस केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह उन सभी महिलाओं का मामला है जो अपनी पहचान और न्याय पाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
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सादर, टीम हैकियत क्या है (दीप्ति शर्मा)
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