‘होल ऑफ स्टेट’ दृष्टिकोण से विज्ञान संस्थानों को जोड़ने की आवश्यकता: अजय सूद की अपील

The post ‘होल ऑफ स्टेट’ दृष्टिकोण से विज्ञान संस्थानों को जोड़ने की जरूरत- अजय सूद appeared first on Avikal Uttarakhand. विज्ञान व तकनीक को आमजन से जोड़ने पर जोर, यूकॉस्ट पहुंचे शीर्ष वैज्ञानिक प्रो. के.के. पंत ने ‘वोकल फॉर लोकल’ आज की जरूरत अविकल उत्तराखण्ड देहरादून। भारत सरकार के प्रधान… The post ‘होल ऑफ स्टेट’ दृष्टिकोण से विज्ञान संस्थानों को जोड़ने की जरूरत- अजय सूद appeared first on Avikal Uttarakhand.

Sep 28, 2026 - 00:39
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‘होल ऑफ स्टेट’ दृष्टिकोण से विज्ञान संस्थानों को जोड़ने की आवश्यकता: अजय सूद की अपील

‘होल ऑफ स्टेट’ दृष्टिकोण से विज्ञान संस्थानों को जोड़ने की आवश्यकता: अजय सूद की अपील

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कम शब्दों में कहें तो, विज्ञान के लाभ को आमजन तक पहुँचाने के लिए ‘होल ऑफ स्टेट’ दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, ऐसा कहना है प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद का।

देहरादून। हाल ही में, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, साथ ही अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन और आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) का दौरा किया। इस दौरान, उन्होंने विज्ञान वाणी 88.8 मेगाहर्ट्ज की सराहना की, जो कि यूकॉस्ट की विज्ञान संचार पहल है।

विज्ञान को आमजन से जोड़ना है प्राथमिकता

प्रो. सूद ने कहा कि उत्तराखंड में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों की उपस्थिति इसे विज्ञान के दृष्टिकोण से एक समृद्ध राज्य बनाती है। उनका मानना है कि इन संस्थानों की विशेषज्ञता और उपलब्धियों को एकीकृत करके ‘होल ऑफ स्टेट’ दृष्टिकोण के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लाभ को आम जनता तक पहुँचाया जा सकता है।

अवसरों का लाभ उठाने पर जोर

उन्होंने ‘होल ऑफ नेशन’ दृष्टिकोण का पक्ष लेते हुए कहा कि यह आवश्यक है कि देशभर में चल रहे वैज्ञानिक कार्यों और तकनीकी हस्तक्षेपों को समाज से जोड़ा जाए। यह न केवल अनुसंधान के लिए एक सुगम वातावरण बनाएगा, बल्कि नागरिकों को वैज्ञानिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगा।

अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता

डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने इस अवसर पर, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एएनआरएफ की विभिन्न पहलों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने उल्लेख किया कि एएनआरएफ के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देशभर में हो रहे शोध एवं वैज्ञानिक गतिविधियों की जानकारी साझा की जा रही है, जिससे एक सशक्त वैज्ञानिक समुदाय का निर्माण हो रहा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग

उन्होंने ‘सरल एआई’ पहल का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग अनुसंधान को अधिक सरल और सुगम बनाने के लिए किया जा रहा है। यह पहल न केवल अनुसंधान प्रक्रिया को तेज करेगा, बल्कि रचनात्मकता को भी बढ़ावा देगा।

स्थानीय नवाचार को वैश्विक मंच पर लाना

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को साझा करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर विकसित ज्ञान, तकनीक और नवाचारों को वैश्विक स्तर पर लाना अब आवश्यक है। उन्होंने यूकॉस्ट और आईआईटी रुड़की के बीच सहयोगात्मक कार्यों की चर्चा की और युवाओं को स्टार्टअप एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

सामाजिक प्रभाव का महत्व

प्रो. दुर्गेश पंत, जो कि यूकॉस्ट के महानिदेशक हैं, ने परिषद की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने विज्ञान संचार, अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक उपलब्धियों को सरल एवं प्रभावी माध्यमों से समाज तक पहुँचाने का महत्व रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण न केवल वैज्ञानिक प्रगति को रोक सकता है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा।

भविष्य की दिशा

इस अवसर पर, अतिथियों ने यूकॉस्ट की विज्ञान केंद्र का अवलोकन किया और हिमालयन गैलरी का विशेष भ्रमण किया। यूकॉस्ट के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए, सभी ने यह दृढ़ संकल्प लिया कि विज्ञान को आम जनता की पहुंच में लाने के प्रयास लगातार चलते रहेंगे।

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— Team Haqiqat Kya Hai, प्रियंका शर्मा

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