रैगिंग के मामले में जांच में नहीं मिली पुष्टि, शिकायत को संदिग्ध बताया गया

The post जांच में नहीं मिली रैगिंग की पुष्टि, शिकायत संदिग्ध appeared first on Avikal Uttarakhand. अविकल उत्तराखंड देहरादून। देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज (जीडीएमसी) में रैगिंग की कथित शिकायत को लेकर प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने स्पष्ट किया है कि संस्थान स्तर पर कराई गई… The post जांच में नहीं मिली रैगिंग की पुष्टि, शिकायत संदिग्ध appeared first on Avikal Uttarakhand.

Apr 9, 2026 - 18:39
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रैगिंग के मामले में जांच में नहीं मिली पुष्टि, शिकायत को संदिग्ध बताया गया

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की शिकायत की जांच में इसे तथ्यहीन और संदिग्ध करार दिया गया है। प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने इस मामले में स्पष्टीकरण दिया है कि प्रशासन शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित करने वाली भ्रामक शिकायतों के प्रति पूरी तरह सतर्क है।

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज (जीडीएमसी) में रैगिंग की कथित शिकायत के संबंध में प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा आयोजित की गई जांच में किसी प्रकार की रैगिंग की घटना के साक्ष्य नहीं मिले। इसकी प्रारंभिक जांच में मामला अपनी प्रकृति में फर्जी प्रतीत हुआ। यही नहीं, संस्थान ने रैगिंग के खिलाफ अपनी 'शून्य सहिष्णुता' नीति को पुनः दोहराया है।

जांच की प्रक्रिया: कॉलेज प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद तात्कालिक तौर पर जांच शुरू की। प्राचार्य ने बताया कि छात्र एवं संबंधित विभाग के कर्मचारियों के बयान के आधार पर शिकायत को संदिग्ध पाया गया। इससे साबित होता है कि भ्रामक शिकायतों की वजह से छात्रों और संस्थान की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

दुष्प्रचार की आशंका: डॉ. जैन ने यह भी कहा कि इस तरह की भ्रामक शिकायतें न केवल शैक्षणिक वातावरण में व्यस्तता लाती हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि दून अस्पताल, जो कि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है, उसके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा सकता है।

जांच में एक क्षणिक मुद्दे भी सामने आए, जैसे कि कुछ छात्रों ने यह स्पष्ट किया कि शिकायतों में व्यक्त किए गए मुद्दे वास्तव में उपयुक्त नहीं थे। शिकायत में उन मुद्दों का उल्लेख किया गया था, जैसे कि फैकल्टी और पीजी डॉक्टर छात्रों को 'दाढ़ी-बाल' संबंधित प्रतिबंधों के लिए निर्देशित कर रहे थे। ऐसे मामलों से यह स्पष्ट है कि शिकायत के पीछे कुछ और तत्व काम कर रहे हैं।

प्राचार्य यह भी बताती हैं कि इस तरह की भ्रांतियों से न केवल चिकित्सकों का समय बर्बाद होता है, बल्कि यह छात्रों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षण गतिविधियाँ और चिकित्सा सेवाएँ स्वाभाविक रूप से जारी हैं।

यदि आपके पास और जानकारी या शिकायत है, तो कृपया हमें संपर्क करें या अधिक अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएं: Haqiqat Kya Hai.

इन भ्रामक शिकायतों से शिक्षण संस्थानों में सकारात्मक माहौल को प्रभावित करने का खतरा हमेशा बना रहता है। हमें उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे मामलों के संदर्भ में सतर्क रहेंगे और शिक्षकों एवं छात्रों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

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