Uttarakhand: पुलिस और बैंकों के बीच समन्वय बैठक का आयोजन, साइबर फ्रॉड में तेजी से कार्रवाई की आवश्यकता
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में पुलिस विभाग एवं बैंकों के साथ साइबर एवं वित्तीय फ्रॉड की रोकथाम, लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के सम्बन्ध में समन्वय बैठक आयोजित हुई। मुख्य सचिव ने साइबर एवं वित्तीय अपराधों में विगत 3-4 वर्षों में हुई वृद्धि को गंभीरता से लेते हुए,बैंकों के साथ होने वाली बैठकों […] The post Uttarakhand:-मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पुलिस विभाग एवं बैंकों के साथ समन्वय बैठक appeared first on संवाद जान्हवी.
Uttarakhand: पुलिस और बैंकों के बीच समन्वय बैठक का आयोजन
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Haqiqat Kya Hai
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में पुलिस विभाग और बैंकों के बीच साइबर एवं वित्तीय फ्रॉड की रोकथाम और लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण पर चर्चा की गई।
बैठक का उद्देश्य हाल के वर्षों में बढ़ते साइबर अपराधों पर चर्चा करना और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाना था। मुख्य सचिव ने बताया कि पिछले 3-4 वर्षों में साइबर और वित्तीय अपराधों में हुई वृद्धि चिंताजनक है। उन्होंने कहा, "हमें इसे एक स्थायी एजेंडा बनाना होगा, ताकि बैंकों के साथ नियमित समीक्षा और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।"
साइबर और वित्तीय फ्रॉड की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम
मुख्य सचिव ने कहा कि पुलिस और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित सूचना-साझाकरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और सेंसिटाइजेशन कार्यक्रमों के आयोजन पर जोर दिया। ये कदम न केवल मामलों के त्वरित निस्तारण में मदद करेंगे, बल्कि साइबर अपराधों को रोकने में भी सहायक सिद्ध होंगे।
मुख्य सचिव ने साइबर फ्रॉड के मामलों में, होल्ड की गई धनराशि को पुन: प्राप्ति प्रक्रिया में लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित पीड़ितों को प्रोएक्टिव तौर पर जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि वे समय पर आवेदन कर सकें। इसके अलावा, बैंकों में शिकायत निवारण मॉड्यूल (जीआरएम) को प्रभावी बना कर शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण का सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
बैंकों और पुलिस के बीच समन्वय की जरूरत
मुख्य सचिव ने इस बात पर बल दिया कि पुलिस विभाग को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के बीच त्वरित और समन्वित कार्रवाई की व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठकों में साइबर और वित्तीय फ्रॉड से संबंधित विषयों को नियमित एजेंडा में शामिल करने की आवश्यकता है।
इसके अलावा, मुख्य सचिव ने साइबर अपराधों में प्रयुक्त होने वाले 'म्यूल अकाउंट्स' की पहचान और रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "पुलिस और बैंकों को मिलकर उन खाता धारकों की पहचान करनी चाहिए जो धोखाधड़ी में शामिल हैं और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।"
साइबर अपराधों के खिलाफ संपूर्ण प्रयास
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि साइबर और वित्तीय अपराधों की रोकथाम के लिए लगातार समन्वय, सूचना साझा करना और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समन्वित प्रयासों से ही साइबर फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है, जिससे पीड़ितों को शीघ्र राहत और धनराशि की बहाली सुनिश्चित की जा सकेगी।
इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भरणे, अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट सहित प्रदेश के विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इसके अलावा, बैठक में बैंकों के कार्यों की समीक्षा कर उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश दिए गए। यह बैठक इस बात का संकेत है कि सरकार साइबर और वित्तीय अपराधों के खिलाफ गंभीर है और इसे रोकने के लिए हर संभव कदम उठाना चाहती है।
अधिक जानकारी एवं अपडेट्स के लिए कृपया यहां क्लिक करें.
Team Haqiqat Kya Hai
What's Your Reaction?