सीबीआई ने चिटफंड घोटाले के आरोपियों के खिलाफ दायर किया आरोप-पत्र
The post सीबीआई ने आरोपियों के विरुद्ध आरोप-पत्र दायर किया appeared first on Avikal Uttarakhand. उत्तराखण्ड का एलयूसीसी चिटफंड घोटाले अविकल उत्तराखण्ड नई दिल्ली। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार 10 जुलाई को उत्तराखंड के लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी)… The post सीबीआई ने आरोपियों के विरुद्ध आरोप-पत्र दायर किया appeared first on Avikal Uttarakhand.
सीबीआई ने चिटफंड घोटाले के आरोपियों के खिलाफ दायर किया आरोप-पत्र
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कम शब्दों में कहें तो, सीबीआई ने उत्तराखंड के लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) चिटफंड घोटाले में 18 आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया है। यह मामला चौंकाने वाली धोखाधड़ी का है जिसमें लगभग 800 करोड़ रुपये की राशि फंस गई है।
नई दिल्ली। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को उत्तराखंड के लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) के चिटफंड घोटाले के संबंध में 18 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में आरोप-पत्र दायर किया है। बीयूडीएस अधिनियम के तहत मामला दायर किया गया है, जिसमें समीर अग्रवाल और अन्य प्रमुख आरोपी शामिल हैं।
एलयूसीसी चिटफंड घोटाला
एलयूसीसी को 2012 में वाजिद खान द्वारा मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया था। समीर अग्रवाल ने 2016 में इसका प्रबंधन अपने हाथ में लिया और इसके बाद से विभिन्न अनियमित जमा योजनाएं चलानी शुरू कीं। हालांकि, एलयूसीसी के पास कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था। इससे शिकार किए गए जमाकर्ताओं की जमा राशि का परिपक्वता भुगतान नए जमाकर्ताओं से प्राप्त राशि से किया गया। यह सब एक पोंजी स्कीम के तहत किया जा रहा था।
जांच में पता चला कि लगभग 1 लाख निवेशकों ने एलयूसीसी में ₹800 करोड़ का निवेश किया और लगभग ₹400 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। आरोपियों ने अवैध फंड के लेनदेन के लिए 10 शेल फर्मों का सहारा लिया।
आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी
जांच के दौरान, मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी विदेश फरार हो गए। सीबीआई ने उन्हें वापस लाने के लिए नोटिस जारी किए हैं। साथ ही, एलयूसीसी के अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारियों शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत और उनके सहयोगियों के खिलाफ भी आरोप-पत्र दायर किया गया है।
जिन्हें गिरफ्तार किया गया है उनमें तरुण कुमार मौर्य और ममता भंडारी शामिल हैं, जिन्होंने बैंकिंग लेनदेन से बचने के लिए राशि को नकद के रूप में स्थानांतरित किया। इस पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया के तहत, सीबीआई ने आरोपियों की संपत्तियों की पहचान की है और 39 संपत्तियों को कुर्क करने के लिए सक्षम प्राधिकारी को संदर्भित किया है।
सीबीआई की भूमिका और अगले कदम
सीबीआई ने इस मामले के लिए विशेष टीम का गठन किया है ताकि आरोपी संपत्तियों की पहचान के साथ-साथ उन्हें गिरफ्तार करने के लिए ठोस कार्रवाई की जा सके। आरोपियों की संपत्तियों की पहचान के बाद, 29 संपत्तियों को कुर्की आदेश के तहत लाया गया है।
यह मामला बिना किसी संदेह के उत्तराखंड की जनता को प्रभावित करने वाली एक बड़ी धोखाधड़ी का है। अब देखना है कि सीबीआई इस घोटाले में न्याय पाने के लिए कितनी तेजी से कदम उठाती है।
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टीम हक़ीक़त क्या है, (साक्षी शर्मा)
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