सीता माता सर्किट के विकास की गति तेज, अधिकारियों ने स्थल का किया निरीक्षण

PAURI: पौड़ी जनपद की सितोनस्यूं पट्टी में मुख्यमंत्री घोषणा के तहत प्रस्तावित सीता माता सर्किट विकसित करने की कवायद तेज हो गई है। शुक्रवार को जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने विस्तृत बैठक कर कार्यवाही तेज करने के निर्देश दिए, शनिवार को संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात ने संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं ग्रामीणों के साथ प्रस्तावित स्थलों […] The post सीता माता सर्किट विकसित करने की कवायद तेज, अफसरों ने ग्राउंड पर जाकर किया निरीक्षण appeared first on Devbhoomi Dialogue.

Aug 23, 2026 - 09:39
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सीता माता सर्किट के विकास की गति तेज, अधिकारियों ने स्थल का किया निरीक्षण
सीता माता सर्किट के विकास की गति तेज, अधिकारियों ने स्थल का किया निरीक्षण

सीता माता सर्किट के विकास की गति तेज, अधिकारियों ने स्थल का किया निरीक्षण

PAURI: पौड़ी जनपद की सितोनस्यूं पट्टी में मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत प्रस्तावित सीता माता सर्किट के विकास की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है। हाल ही में जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने इस संबंध में विस्तृत बैठक का आयोजन कर कार्यवाही को तेज करने के निर्देश दिए। इसके पश्चात, शनिवार को संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात ने संबंधित विभागों के अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रस्तावित स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात ने इस निरीक्षण के दौरान विकास कार्यों, पर्यटकीय सुविधाओं और अनिवार्य आकृतियों की स्थापना के लिए उपयुक्त स्थलों का आकलन किया। उन्होंने ग्रामीणों से सुझाव लेते हुए कहा कि सीता सर्किट को योजना के अनुसार आकर्षक और सुविधायुक्त बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय सुझावों को कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा ताकि यह विकास धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप हो सके।

मुख्य स्थलों की विकास योजना

गौरी प्रभात ने सितोनस्यूं पट्टी में विदाकोटी मंदिर, फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर, वाल्मीकि मंदिर एवं देवल के लक्ष्मण मंदिर के विकास के लिए एक कार्य योजना तैयार करने पर चर्चा की। पहले चरण के विकास के लिए 78 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। विधायक राजकुमार पोरी ने सीता सर्किट के विकास को लेकर कहा कि यह स्थानीय रोजगार, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

प्रथम चरण में सौंदर्यीकरण और सुविधाएं

इस चरण में प्रमुख स्थलों पर रामायण कथाओं और धार्मिक-ऐतिहासिक प्रसंगों पर आधारित म्यूरल, वॉल म्यूरल, स्कल्पचर, दिशा-सूचक साइनेज, वाटर एटीएम, और यात्री सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा, मंदिरों में मरम्मत, रंग-रोगन और अन्य आधारभूत सुविधाओं के कार्य भी शामिल होंगे। विशेष रूप से, देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर में साइनेज के विकास का कार्य पहले चरण में किया जाएगा, जबकि पार्किंग की व्यवस्था दूसरे चरण में की जाएगी।

द्वितीय चरण के कार्य

दूसरे चरण में फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर तक संपर्क मार्ग, सड़क मुआवजा, देवल लक्ष्मण मंदिर में पार्किंग, सीता माता मंदिर में धर्मशाला की स्थापना और मंदिर परिसरों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल की जाएंगी। इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। अधिकारियों को भूमि सहमति और मुआवजा आकलन को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्राकृतिक और आध्यात्मिक परिवेश का विकास

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि पौराणिक एवं ऐतिहासिक कथाओं को प्रमाणिक और आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया जाए। मंदिर परिसरों का विकास प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण के अनुरूप होना चाहिए। अनावश्यक निर्माण से बचते हुए उपयोगी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

इसके साथ ही, वास्तविक तस्वीरों के आधार पर डिजाइन, परिक्रमा पथ, खुले-साफ परिसर और सोलर पैनलों की व्यवस्थित स्थापना की भी योजना बनाई गई है।

कम शब्दों में कहें तो, सीता माता सर्किट का विकास अब तेजी से हो रहा है। इसके तहत अधिकारियों द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया और स्थानीय जनता के सुझाव भी शामिल किए जाएंगे। विकास कार्यों से धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

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