राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सुनाया अपने करियर का खास किस्सा
ROORKEE: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल शनिवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह मे शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अपने करियर का रोचक किस्सा सुनाया उन्होंने बताया कि एक युवा अधिकारी के तौर पर अपनी पोस्टिंग के समय एक बार उनके साथियों को चीन कीसेना पकड़ कर ले गई, वे लौटकर नहीं आए कतो मुझे […] The post एक वक्त लगा कि मेरा मेरा करियर खत्म, चीनी सेना मेरे लोगों को पकड़ कर ले गई, NSA ने छात्रों को सुनाया मिशन का खास किस्सा appeared first on Devbhoomi Dialogue.
एक वक्त लगा कि मेरा करियर खत्म, चीनी सेना मेरे लोगों को पकड़ कर ले गई
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ROORKEE: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शनिवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में कई जानकारियाँ साझा कीं। उन्होंने अपने करियर के एक महत्वपूर्ण पल का रोचक किस्सा सुनाया, जिसमें बताया कि एक समय उनकी टीम के कुछ सदस्य चीनी सेना द्वारा पकड़ लिए गए थे। उस समय उन्होंने सोचा था कि अब उनका करियर खत्म होने वाला है।
चीन बॉर्डर पर तैनाती की कहानी
आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्रों के सामने अजीत डोभाल ने उस समय की याद ताजा की जब वह केवल 20 वर्ष के थे और इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नए थे। उन्हें सिक्किम में खुफिया तंत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसमें उन्हें बॉर्डर वाले इलाकों की सुरक्षा और PLA व चीनी सेना की गतिविधियों पर ध्यान रखना था। डोभाल ने कहा, “मेरी जिम्मेदारी में बॉर्डर पर इंटेलिजेंस इकट्ठा करना और चीनी परंपराओं की जानकारी हासिल करना शामिल था।”
उन्होंने साझा किया कि एक विशेष ऑपरेशन के तहत, उनके द्वारा भेजे गए इंटेलिजेंस मिशन को निर्धारित समय से वापस लौटना था। लेकिन जब वे पाँच और फिर दस दिन तक वापस नहीं आए, तो डोभाल के लिए चिंता बढ़ गई। "मुझे हेडक्वार्टर से फोन आया और मुझे बताया गया कि मेरे साथी चीनी हिरासत में हैं। शायद किसी बातचीत या नेगोशिएशन की वजह से उन्हें वापस लाया गया," उन्होंने कहा।
जिंदगी का एक सवाल
डोभाल ने बताया कि उस समय उन्हें ऐसा लगा था कि उनका करियर खत्म हो गया है। वह बेहद चिंतित थे कि अब उन्हें किसी और करियर की तलाश करनी पड़ेगी। लेकिन अंत में उन्हें विश्लेषण करने पर पता चला कि उनकी कोई गलती नहीं थी। उनका एक सहयोगी, एक तिब्बती शेरपा, ने उन्हें समझाया कि “ज़िंदगी एक सवाल है, कुछ लोग अपनी मैप रीडिंग सही कर लेते हैं, और कुछ गलत।”
इस अनुभव ने डोभाल को यह समझाने का एक महत्वपूर्ण मौका दिया कि करियर में कठिनाईयों को अंतिम पड़ाव नहीं मानना चाहिए। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि ऐसे मुश्किल क्षणों को जीवन की यात्रा में एक सीख के रूप में देखना चाहिए।
यह किस्सा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने केवल अपने अनुभव को साझा करने के लिए नहीं कहा, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि कैसे चुनौतियों का सामना करने का साहस होना चाहिए।
कम शब्दों में कहें तो, अजीत डोभाल ने इस मौके पर अपने करियर की चुनौतियों और उन्हें पार करने की महत्ता पर प्रकाश डाला। इससे विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिली कि विपरीत परिस्थितियों में धैर्य कैसे रखना चाहिए।
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सादर,
टीम हकीकत क्या है
शिल्पा रानी
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