मलेशिया के साथ संस्कृत और रामायण संबंधों की नई पहल

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Sep 19, 2026 - 09:39
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मलेशिया के साथ संस्कृत और रामायण संबंधों की नई पहल

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में मलेशिया के साथ संस्कृत और रामायण के संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

अविकल उत्तराखण्ड, देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने हरिद्वार में यज्ञ के साथ ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया। इसके साथ ही नई दिल्ली में मलेशिया के उच्चायोग के अधिकारियों के साथ विभिन्न सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक पहलुओं पर चर्चा की गई।

यज्ञ से ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ

हरिद्वार में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने ऋषिकुल विद्यापीठ संस्कृत महाविद्यालय में यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। दीपक कुमार ने इस मौके पर बताया कि प्रधानमंत्री का जन्मदिन कर्मयोग के प्रति प्रेरणा देने वाला है और उन्होंने संस्कृत छात्रों से अपनी श्रेष्ठता की भावना को जागृत करने का आग्रह किया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. विनय विद्यालंकार ने भारतीय ज्ञान परंपरा और वेदों के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान को वैश्विक प्लेटफार्म पर लाना अत्यंत आवश्यक है।

समारोह का दृश्य

संस्कृत और रामायण पर सहयोग की पहल

नई दिल्ली में, दीपक कुमार ने मलेशिया के चार्ज डी’अफेयर्स शरीफा एज्नीदा वफा से मुलाकात की। इस चर्चा में भारत और मलेशिया के बीच सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। उन्होंने संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की, जिसमें मलेशिया के विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग की व्यवस्था की गई है।

इस कार्ययोजना के तहत, मलेशिया और भारत के विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों एवं प्रोफेसरों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं। इसमें वाल्मीकि रामायण और ‘हिकायत सेरी रामा’ का तुलनात्मक अध्ययन भी शामिल है। इसके अलावा, मलेशियाई प्रवासी समुदाय की भूमिका पर भी चर्चा की गई, जिसमें उनके योगदान को सराहा गया।

मलेशियाई उच्चायोग की अधिकारी ने इन प्रस्तावों को महत्व देते हुए भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग में रुचि व्यक्त की। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड में चारधाम स्थलों का भी उल्लेख किया।

उपसंहार

संस्कृत भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने की इस पहल के तहत, भारत और मलेशिया के संबंधों को मजबूती मिलेगी। इससे न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान होगा, बल्कि दोनों देशों के बीच शैक्षणिक संबंध भी मजबूत होंगे।

अतः, यह पहल भारत की संस्कृत भाषा को न केवल जागरूकता, बल्कि वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सभी उपलब्धताओं और विचारों के साथ, हमें अभी से इनके अमल की प्रतीक्षा करनी चाहिए। इसके माध्यम से हम न केवल अपने संस्कारों को संजीवनी देंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अपनी पहचान भी बनाएंगे।

यह लेख Haqiqat Kya Hai पर अपडेटेड रहेगा।

सादर,
टीम हक़ीक़त क्या है
शालिनी शर्मा

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