चंपावत: विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की गड़बड़ी से जिला पंचायत सदस्य की सदस्यता समाप्त
CHAMPAWAT: चंपावत की राजनीति में आज एक बहुत बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब जिला जज की अदालत ने शक्तिपुर बूंगा जिला पंचायत सीट से जिला पंचायत सदस्य कृष्णानंद जोशी का निर्वाचन रद्द कर दिया। जिला जज ने ये फैसला जिला पंचायत सदस्य के दो-दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होने के मामले में दिया। […] The post चंपावत: वोटर लिस्ट में दो-दो जगह नाम रहना पड़ा भारी, जिला पंचायत सदस्य की कुर्सी छिनी appeared first on Devbhoomi Dialogue.
चंपावत: वोटर लिस्ट में दो-दो जगह नाम रहना पड़ा भारी, जिला पंचायत सदस्य की कुर्सी छिनी
CHAMPAWAT: चंपावत की राजनीति में आज एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब जिला जज की अदालत ने शक्तिपुर बूंगा जिला पंचायत सीट से जिला पंचायत सदस्य कृष्णानंद जोशी का निर्वाचन रद्द कर दिया। इस निर्णय का कारण यह बना कि कृष्णानंद जोशी के नाम वोटर लिस्ट में दो-दो स्थानों पर पंजीकृत थे, जो चुनाव संबंधी नियमों के खिलाफ है।
कम शब्दों में कहें तो, चंपावत में जिला पंचायत सदस्य बनने के बाद जोशी की सभी उम्मीदें चुराई गईं, एक प्रशासनिक चूक के चलते। चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह निर्णय आवश्यक था। भाजपा प्रत्याशी मनमोहन सिंह बोहरा ने चुनाव आयोग में कृष्णानंद जोशी के निर्वाचन को चुनौती दी थी, जिसके बाद अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला लिया।
2025 में हुए पंचायती चुनावों में, कृष्णानंद जोशी ने भाजपा के मनमोहन सिंह बोहरा को 345 मतों से हराकर विजयी हुए थे। लेकिन इस जीत में उनकी पंजीकरण की गड़बड़ी उनके लिए भारी पड़ी। मनमोहन सिंह बोहरा ने आरोप लगाया था कि विजेता प्रत्याशी के दो अलग-अलग स्थानों पर वोटर सूची में नाम होने से चुनावी प्रक्रिया में धांधली हुई।
आज, जिला न्यायालय ने कृष्णानंद जोशी के निर्वाचन को रद्द करते हुए मनमोहन सिंह बोहरा के पक्ष में फैसला दिया है। इस निर्णय के बाद शक्तिपुर बूंगा सीट रिक्त मानी जाएगी और अब इस पर उपचुनाव कराए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम चंपावत की राजनीति में न केवल एक बड़ा संदेश देगा, बल्कि आने वाले चुनावों में प्रत्याशियों को भी अपनी पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने पर मजबूर करेगा। यदि अन्य नेताओं को भी इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा, तो यह आगामी चुनावों के लिए एक चेतावनी का संकेत भी हो सकता है।
चंपावत की इस घटनाक्रम ने यह पुनः प्रस्तुत किया है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यापन कितना महत्वपूर्ण है। इससे यह भी पता चलता है कि निर्वाचन आयोग और अदालतें कैसे तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए अपने कार्यों को सख्ती से लागू करती हैं।
Haqiqat Kya Hai पर इस घटनाक्रम की और जानकारी के लिए यहाँ जाएँ.
टीम हैकियात क्या है के द्वारा साक्षी देवी
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