उत्तराखण्ड में आदर्श कृषि एवं उद्यान गांवों का विकास: किसानों की आय बढ़ाने की नई योजना

14 May 2026. Dehradun. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित उत्तराखण्ड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि राज्य Continue Reading » The post उत्तराखण्ड के प्रत्येक विकासखण्ड में विकसित होंगे आदर्श कृषि एवं उद्यान गांव, किसानों की आय बढ़ाने, जैविक खेती, वैज्ञानिक तकनीक और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तीन वर्षीय कार्ययोजना बनाने के मुख्यमंत्री ने दिये निर्देश appeared first on Mirror Uttarakhand.

May 15, 2026 - 00:39
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उत्तराखण्ड में आदर्श कृषि एवं उद्यान गांवों का विकास: किसानों की आय बढ़ाने की नई योजना
उत्तराखण्ड में आदर्श कृषि एवं उद्यान गांवों का विकास: किसानों की आय बढ़ाने की नई योजना

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के प्रत्येक विकासखण्ड में आदर्श कृषि एवं उद्यान गांव विकसित करने के लिए एक नई कार्ययोजना की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और जैविक खेती को बढ़ावा देना है।

14 मई 2026 को, देहरादून में मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित उत्तराखण्ड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विकासखण्ड से एक गांव का चयन किया जाएगा, जिसे कृषि और उद्यान के क्षेत्र में आदर्श गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का उपयोग कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।

भौगोलिक अध्ययन के आधार पर योजनाएं

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि प्रत्येक क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, जलवायु, और भूमि की गुणवत्ता का गहन अध्ययन किया जाए। इसके बाद ही यह निर्धारित किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन-से कृषि उत्पाद अधिकतम विकसित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्ययोजना के माध्यम से उत्तराखण्ड को कृषि और बागवानी के क्षेत्र में एक नई पहचान दी जा सकती है।

तीन वर्षीय कार्ययोजना पर जोर

मुख्यमंत्री धामी ने यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि आगामी तीन वर्षों की विस्तृत कार्ययोजना में किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा जाए। उन्होंने कृषि उत्पादन को बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के लिए विशेष प्रयास करने की आवश्यकता जताई। इस कार्ययोजना में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल शामिल होंगी।

कृषि गोष्ठियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन

मुख्यमंत्री ने गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर और अन्य संस्थानों के सहयोग से कृषि गोष्ठियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करने का भी सुझाव दिया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, बेहतर खेती के तरीकों, और उच्च गुणवत्ता वाले पौध, बीज, और खाद उपलब्ध कराई जाएगी।

टीकाकरण और उत्पादन में विविधता

मुख्यमंत्री ने तिलहनी फसलों जैसे सरसों, तिल, सूरजमुखी, और सोयाबीन के उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को इन फसलों से जुड़ी जानकारी और जागरूकता प्रदान की जाए, जिससे कृषि विविधीकरण और बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके।

विपणन में सहयोग और डिजिटल तकनीक का उपयोग

मुख्यमंत्री ने बायोगैस संयंत्र और सौर ऊर्जा संचालित पंपों के उपयोग को प्रोत्साहित करने और किसानों को उनकी उपज के विपणन में हर संभव सहयोग प्रदान करने के निर्देश भी दिए। डिजिटल माध्यमों के जरिए बिक्री के लिए आवश्यक सुविधाएं और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।

लैब से भूमि तक की नीति

मुख्यमंत्री ने शोध और तकनीकी नवाचारों को सीधे किसानों तक पहुँचाने के लिए "लैब टू लैंड" जैसी योजनाओं को प्रोत्साहित करने की बात कही। इसका उद्देश्य कृषकों को नवीनतम तकनीकी जानकारी और संसाधनों से जोड़ना है।

बैठक के दौरान, उत्तराखण्ड मंडी परिषद के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार डब्बू, सचिव डॉ. एस.एन. पाण्डेय, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी, और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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इस योजना से उम्मीद है कि किसान अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और कृषि क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को छू सकेंगे।

Team Haqiqat Kya Hai

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