वर्षा जल संचयन से भूजल को बढ़ावा देने पर विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण सुझाव

The post वर्षा जल संचयन से भूजल बढ़ाने पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव appeared first on Avikal Uttarakhand. हिमालयी क्षेत्रों में जल संरक्षण को लेकर यूकॉस्ट का विशेष व्याख्यान जंगलों में आग रोकने पर विशेषज्ञों ने रखे विचार अविकल उत्तराखण्ड देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट)… The post वर्षा जल संचयन से भूजल बढ़ाने पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव appeared first on Avikal Uttarakhand.

May 24, 2026 - 18:39
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वर्षा जल संचयन से भूजल को बढ़ावा देने पर विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण सुझाव
वर्षा जल संचयन से भूजल को बढ़ावा देने पर विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण सुझाव

वर्षा जल संचयन से भूजल को बढ़ावा देने पर विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण सुझाव

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कम शब्दों में कहें तो, जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज की दिशा में विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उत्तराखंड में आयोजित एक कार्यक्रम में विषय पर विस्तृत चर्चा की गई है।

देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा शनिवार को “मां धरा नमन” जल शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत “हिमालयी पर्वतीय भूभाग में वर्षा जल संचयन के प्रयास” विषय पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि भविष्य में जल संकट की समस्या को देखते हुए अभी से ही गंभीर प्रयास करने होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि यूकॉस्ट द्वारा “मां धरा नमन” कार्यक्रम के अंतर्गत राज्यभर में जल संरक्षण के लिए शिक्षा दी जा रही है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों और आम जन को जल संरक्षण तथा वैज्ञानिक अध्ययन से जोड़ना है।

विशेषज्ञों के सुझाव

कार्यक्रम के संयोजक और यूकॉस्ट के वैज्ञानिक डॉ. भवतोष शर्मा ने विषय विशेषज्ञ एवं पर्यावरणविद् चंदन नयाल का परिचय कराया। चंदन नयाल ने “हिमालयी पर्वतीय भूभाग में वर्षा जल संचयन के प्रयास” पर व्याख्यान देते हुए बताया कि पिछले 15 वर्षों में नैनीताल जनपद में 6,000 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण हुआ है, जिसमें चाल, खाल, खंतियां और पोखर शामिल हैं।

इन संरचनाओं के निर्माण से जल स्तर बढ़ा है, जंगलों में आग लगने की घटनाओं में कमी आई है और जल स्रोतों और स्प्रिंग्स के डिस्चार्ज में भी वृद्धि देखी गई है।

जल विज्ञान के वैज्ञानिक पहलू

विशेषज्ञ ने नौले-धारों के पारंपरिक विज्ञान, ग्रीष्मकाल में वर्षा जल पोषित नदियों की स्थिति, कोसी जलागम क्षेत्र में भूजल प्रबंधन और वर्षा जल संचयन के वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों का उपयोग कर अधिक प्रभावी जल संरक्षण किया जा सकता है।

जल संचयन प्रयास

कार्यक्रम की सहभागिता

इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यालयों के छात्रों ने प्रोजेक्टर के माध्यम से सामूहिक रूप से भाग लिया। इसके अलावा, मानसखंड साइंस सेंटर अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों, विभिन्न संस्थानों, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और यूकॉस्ट के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने भी भाग लिया। कुल मिलाकर 145 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. भवतोष शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ओम प्रकाश नौटियाल ने दिया।

जल संरक्षण और उसकी दिशा में उठाए गए कदम निश्चित रूप से आने वाले समय में जल संकट को कम कर सकते हैं। इसके लिए हमें सभी स्तरों पर जन जागरूकता फैलाना होगा। जल ही जीवन है, इस मूल मंत्र को अपनाकर हम सभी को मिलकर जल संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाना होगा।

इस महत्वपूर्ण विषय पर और अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट पर आ सकते हैं।

सादर,
श्रीमती प्रिया रावत
टीम Haqiqat Kya Hai

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