प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष: गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार
The post प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे appeared first on Avikal Uttarakhand. एक दिन में 6997 गर्भवतियों की हुई जांच उत्तराखंड में 709 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी चिन्हित, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का दावा अविकल उत्तराखंड देहरादून। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए)… The post प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 साल पूरे appeared first on Avikal Uttarakhand.
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष: गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार
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कम शब्दों में कहें तो प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के 10 साल पूरे होने पर उत्तराखंड में 6997 गर्भवतियों की जांच की गई, जिसमें 709 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान की गई। यह अभियान मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उत्तराखंड में आयोजित विशेष स्वास्थ्य जांच और जागरूकता कार्यक्रमों ने गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को नई दिशा दी है। सोमवार को समूचे राज्य में, पीएमएसएमए के तहत 6997 गर्भवतियों को प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) सेवाएं प्रदान की गईं। इसमें 709 उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान की गई और उनके उपचार हेतु उचित व्यवस्था की गई।
अभियान की शुरुआत और उद्देश्य
9 जून 2016 को भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं, विशेषकर प्रसवपूर्व जांच और विशेषज्ञ परामर्श, प्रदान करना है। इसके अलावा, यह अभियान उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान कर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने का भी कार्य करता है। सरकार की पहल के तहत, प्रतिमाह की 9 तारीख को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा गर्भवती महिलाओं की नि:शुल्क जांच की जाती है।
जांच और पंजीकरण के आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार, पीएमएसएमए पोर्टल पर अब तक 2 लाख 9 हजार 125 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। विशेष तौर पर आयोजित 10वीं वर्षगांठ के प्रोग्राम में 4021 महिलाओं को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और 3129 महिलाओं को अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं प्रदान की गई हैं। इसके साथ ही 748 महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच भी कराई गई।
महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दे
अभियान के अंतर्गत गंभीर एनीमिया, गर्भकालीन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एचआईवी, टीबी, हेपेटाइटिस-बी जैसी जटिलताओं वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी की जाती है। ये उपाय समय पर पहचान और उपचार के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं को कम करने में काफी सहायक साबित हो रहे हैं।
प्रशंसा और प्रतिबद्धता
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अभियान को राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती प्रदान करने वाला बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हर गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व, सही समय पर जांच और उच्च गुणवत्ता का उपचार उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने भी मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए नियमित एएनसी जांच और प्रभावी रेफरल व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया है। इसके अलावा, स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय ने डिजिटल निगरानी और ट्रैकिंग सिस्टम की महत्ता पर बल दिया, जिससे सेवा वितरण में पारदर्शिता और दक्षता आई है।
भविष्य की दिशा
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि पीएमएसएमए पोर्टल और मातृ स्वास्थ्य 'वार रूम' के माध्यम से उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। मातृ मृत्यु दर को और अधिक कम करने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और सामुदायिक स्तर पर लगातार प्रयास जारी हैं।
इस प्रकार, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने भारत में मातृ स्वास्थ्य में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। यह सुनिश्चित करता है कि गर्भवती महिलाएं उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाएं और सुरक्षित मातृत्व के अनुभव से गुजरे।
हम इस अभियान की सफलता की कामना करते हैं और आशा करते हैं कि आने वाले वर्षों में यह और भी मजबूत हो।
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सादर,
टीम हक़ीकत क्या है
आरती कुमारी
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